संवाद न्यूज एजेंसी
कोछाभांवर। सुखद दांपत्य जीवन के लिए कुंडली के साथ-साथ मन का मिलना भी जरूरी है। ज्योतिषविदों का कहना है कि विवाह के फेरे शुभ मुहूर्त में ही होने चाहिए। पारिवारिक, धार्मिक परंपराओं और संस्कारों का पालन करना भी आवश्यक है।
सोशल मीडिया के दौर में पाश्चात्य संस्कृति के प्रभाव के कारण कई ऐसे दंपती हैं, जिनका वैवाहिक जीवन ठीकठाक नहीं रहता है। कुछेक मामले खबरों में सुर्खियां भी बन जाती हैं। ज्योतिषविदों एवं धार्मिक विद्वानों के अनुसार, सुखद वैवाहिक जीवन के लिए पति और पत्नी में एक-दूसरे के प्रति प्रेम, सम्मान, विश्वास एवं आपसी संवाद होना आवश्यक है। महंत मार्तंड स्वामी के अनुसार, कुंडली मिलान के साथ लड़का और लड़की की पसंद भी पहले जानना चाहिए। उनके अनुसार, आजकल शादियों में मुहूर्त पर विशेष ध्यान नहीं दिया जाता है। जबकि विवाह के फेरे शुभ मुहूर्त में होने चाहिए।
वर एवं वधू की कुंडली में सप्तम भाव में क्रूर ग्रह यदि हो तो उनकी शांति के लिए विवाह से पहले पूजा कराना चाहिए। आचार्य सुबोध शास्त्री के अनुसार, जल्दबाजी में कुंडली नहीं मिलवाना चाहिए। हस्त रेखा से भी उत्तम वैवाहिक जीवन का पता लग सकता है। विवाह लग्न मुहूर्त का विशेष महत्व है। बृहस्पति एवं भगवान शिव व माता पार्वती की पूजा आराधना करने से सुखद दांपत्य जीवन रहता है।