ग्वालियर रोड स्थित आर्मी का एविएशन बेस पिछले एक दशक से सेना को उड़ान देने में जुटा है। यहां संचालित बेसिक एविएशन ट्रेनिंग स्कूल में सेना के लोगों को हेलीकाप्टर उड़ाने की ट्रेनिंग दी जा रही है। अब तक 157 पायलट तैयार किए जा चुके हैं। अगले माह 23वें बैच की ट्रेनिंग पूरी होगी।
ग्वालियर रोड स्थित हवाई पट्टी तीन दशक से अधिक पुरानी है। लेकिन, यहां 2007 से आर्मी का बेसिक एविएशन ट्रेनिंग स्कूल संचालित किया जा रहा है। खास बात यह है कि इलाहाबाद के बाद सेना का झांसी में दूसरा एविएशन ट्रेनिंग स्कूल है, जिसमें प्रति वर्ष दो बैच में सेना के लोगों को हेलीकाप्टर उड़ाने की ट्रेनिंग दी जाती है। यहां से ट्रेनिंग प्राप्त करने के बाद सेना के यह जांबाज से बाढ़ या अन्य किसी भी तरह की आपदा में हेलीकाप्टर के जरिये अपनी जान पर खेलकर लोगों की जान बचाने का काम करते हैं। ट्रेनिंग के दौरान उन्हें हेलीकाप्टर की तकनीकी जानकारी तो प्रदान की ही जाती है, साथ ही पचास घंटे की उड़ान का भी मौका मिलता है। ट्रेनिंग स्कूल के अब तक 22 बैच पूर्ण हो चुके हैं। नवंबर के अंत तक 23वें बैच का प्रशिक्षण पूर्ण हो जाएगा।
सोशल मीडिया पर शेयर न करें फोटो
भारतीय सेना ने देश के लोगों को हमेशा से ही गौरान्वित किया है। यही वजह है कि अक्सर लोग सेना के सड़क से गुजरते वाहन और सैन्य उपकरणों के साथ फोटो /सेल्फी लेकर उसे सोशल मीडिया पर वायरल कर देते हैं। लेकिन, यह देश की सुरक्षा के लिए ठीक नहीं है। आर्मी एविएशन बेस के कमांडर कर्नल मल्कियत सिंह ने बताया कि इससे सेना के मूवमेंट की जानकारी सार्वजनिक होती है, जबकि यह बेहद गोपनीय विषय होता है। लोग सेना के मूवमेंट से जुड़ी किसी भी प्रकार की जानकारी को सार्वजनिक न करें।