पूर्वी लद्दाख में गलवां घाटी में चीन के दुस्साहस के बाद झांसी-बबीना में भी सेना को हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है। अफसर और सेना के जवानों को किसी भी स्थिति का सामना करने के लिए तैयार रहने की हिदायत दे दी गई है।
झांसी-बबीना में सेना की टुकड़ियों को समय-समय पर विभिन्न देशों की सेना के साथ संयुक्त युद्धाभ्यास का अनुभव है। टी-90 भीष्म टैंक, बोफोर्स, बीएमपी आदि के साथ मैकेनाइज्ड इंफेंट्री का साझा अनुभव है। बबीना के सैन्य बेड़े में अब दुश्मन के छक्के छुड़ा देने वाली अत्याधुनिक और मारक के-9 वज्र आर्टलरी गन भी शामिल हो गई है।
होली पर सेना के तमाम जवान, अफसर अपने-अपने घर गए थे। लॉकडाउन और कोरोना संक्रमण के खतरे के कारण वे वापस नहीं आ सके हैं। उन्हें उनके घर के पास की यूनिट में रिपोर्ट करने के निर्देश दे दिए गए थे, लेकिन अब गलवां घाटी में चीनी सेना द्वारा भारतीय सैनिकों पर हमले और इसमें कर्नल समेत 20 भारतीय सैनिकों के शहीद होने के बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई है।
हालात कोई भी मोड़ ले सकते हैं। अब सभी को विषम से विषम परिस्थितियों के लिए तैयार रहने और आदेश मिलते ही रिपोर्ट करने के निर्देश दिए गए हैं। कई विशेषताओं के कारण झांसी-बबीना के सैनिकों की भूमिका युद्ध में निर्णायक होती है। इसलिए यहां की सेना को हाई अलर्ट कर दिया गया है।
रूस सेना का अनुभव भी चीन के खिलाफ आएगा काम
झांसी के बबीना में समय-समय पर संयुक्त युद्धाभ्यास होते रहे हैं। 2019 में भी भारत-रूस संयुक्त युद्धाभ्यास का मुख्यालय बबीना ही रहा था। दोनों देशों की सेना, नौ सेना और वायु सेना ने विशेष तकनीक और युद्धनीति साझा की थीं।
इसमें बबीना में सैन्य अभ्यास के साथ ही पुणे में वायुसेना और गोवा में दोनों देशों की नौसेना ने रणकौशल का प्रदर्शन किया था। इस युद्धाभ्यास में बबीना में रूस की पूर्वी सैन्य जिले की 5वीं सेना के प्रमुख मेजर जनरल सेकोव ओलेग के नेतृत्व में सैन्य टुकड़ी आई थी।
रूस की यह सैन्य टुकड़ी रूस-चीन बॉर्डर पर तैनात है। यह चीन के बचाव और रण कौशल से बखूबी वाकिफ है। सूत्रों के अनुसार इस संयुक्त युद्धाभ्यास में लिए गए अनुभव चीन के खिलाफ भी काम आएंगे। 2018 में भी भारत-रूस सेना ने बबीना में इंद्र-2018 में संयुक्त युद्धाभ्यास किया था।