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तीन करोड़ से बनी नई विद्युत लाइनें बेमानी

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ओवरलोडिंग की समस्या दूर करने के लिए बनाए गए दुनारा ट्रांसमिशन सबस्टेशन का पर्याप्त लाभ विद्युत उपभोक्ताओं को नहीं मिल पा रहा है। इसका बड़ा कारण आए दिन इससे जुड़ी लाइनों में होने वाले फाल्ट है। एक महीने में चार फाल्ट तो हो ही जाते हैं और तब जुड़े 30 से अधिक इलाकों की बिजली गुल हो जाती है। एक साल पहले तक हंसारी ट्रांसमिशन सबस्टेशन के जरिए 13 सबस्टेशन जुड़े थे। इनके जरिए ही पूरे शहर को बिजली दी जाती थी। तब सबसे बड़ी समस्या ओवरलोडिंग की थी। बड़े पैमाने पर कटौती की जाती थी। इस समस्या को दूर करने के लिए तीन करोड़ की लागत से दुनारा में नया ट्रांसमिशन सबस्टेशन बनाया गया और हंसारी ट्रांसमिशन के दो सबस्टेशन दुनारा से जोड़ दिए गए। इससे ओवरलोडिंग की समस्या तो किसी हद तक कम हो गई लेकिन नई दिक्कत बड़े पैमाने पर फाल्ट के रूप में पैदा हो गई। बताया गया कि दुनारा ट्रांसमिशन सबस्टेशन से निकली वाली लाइनें दुरुस्त नहीं हैं। कहीं इनमें झोल है तो कहीं तार कमजोर हैं। इसी कारण ये लाइनें तेज हवा के झोंके नहीं झेल पातीं और टूट जाती हैं। इसका खामियाजा 30 इलाकों के 12 हजार से अधिक उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ता है। पूर्व में हंसारी ट्रांसमिशन पावर हाउस से आने वाली 33 केवी लाइन से सीपरी बाजार, सूती मिल और उन्नाव गेट पंचवटी सब स्टेशन जुड़े हुए थे। एक ही लाइन से जुड़े होने के कारण तीनों सब स्टेशनों पर अकसर ओवर लोडिंग की समस्या बनी रहती थी। इस कारण विभाग ने सूती मिल और पंचवटी सब स्टेशनों को बड़ागांव के दुनारा स्थित 220 केवी सब स्टेशन से जोड़ने की योजना तैयार की थी। एक ही लाइन पर पंचवटी और सूती मिल के लिए 33 केवी फीडर बनाए गए। पंद्रह किलोमीटर इस लाइन में करीब 270 खंभे लगाए गए हैं। सूती मिल और उन्नाव गेट सब स्टेशनों को इस लाइन से करंट दिया जा रहा है। लेकिन इस लाइन में महीने में कई बार फाल्ट होते हैं। इससे संबंधित क्षेत्र के लोगों को घंटों अंधेरे में गुजारने पड़ते हैं। आंधी और बारिश होते ही लाइन में फाल्ट आ जाते हैं। खामियां ------- - रास्ते के कई खंभे तिरछे हो गए हैं। - कई खंभों के बीच खींचे तारों में स्पान (खिंचाव) नहीं है। इस कारण ये ढीले हो गए हैं। आंधी के दौरान तार आपस में टकराने पर फाल्ट हो जाता है। - नई लाइन के इंसुलेटर और डिस्क पहली बारिश में ही बर्स्ट होने लगे है।
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