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महंगी हुईं पशुओं की खुराक, भूसे के रेट दो साल में दोगुने...पशुओं को बेचने लगे ग्रामीण

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झांसी। ग्रामीणों के लिए अब गाय, भैंस पालना आसान नहीं रह गया है। दो साल में भूसे के दाम दोगुने हो गए हैं। खल व जौ की कीमतों में भी लगातार इजाफा हो रहा है। हाल ये है कि जिनके पास बहुत अधिक संख्या में पशु थे, उनका खर्चा न उठा पाने की वजह से बेचना शुरू कर दिया है। कई जगह किसान पशुओं को बटाई तक पर दे रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि दूध बेचकर भी पशुओं की खुराक का इंतजाम नहीं कर पा रहे हैं।
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पशुपालकों ने बताया कि दो साल पहले तक झांसी में अप्रैल-मई में भूसा 270 से 300 रुपये क्विंटल बिकता था। पिछले साल इसके दाम बढ़कर 400 रुपये क्विंटल तक पहुंच गए थे। मगर इस साल 800-900 रुपये क्विंटल बिक रहा है। यही नहीं, पिछले साल तक 32 रुपये किलो बिकने वाली खल अब 42 रुपये पहुंच गई है। एक साल में जौ की कीमत भी 15 से बढ़कर 30 रुपये प्रति किलो हो गई है। पशुपालकों ने कहा कि जिस गाय और भैंस को पालने में दो साल पहले तीन हजार रुपये खर्च आता था, वो अब बढ़कर पांच से छह हजार रुपये पहुंच गया है। इसके अलावा जिन्होंने गाय, भैंसों की देखरेख के लिए कर्मचारी लगा रखे हैं, उनका तो और भी अधिक खर्च होता है। बताया कि इतनी महंगाई में कई पालक पशुओं का खर्च नहीं उठा पा रहे हैं तो वो उन्हें बेच दे रहे हैं।
ये हैं दरें
भूसा - 800-900 रुपये प्रति क्विंटल
खल - 42 रुपये प्रति किलो
जौ - 30 रुपये प्रति किलो
दो साल में 10 रुपये बढ़े दूध के दाम
पशुपालकों ने बताया कि भूसे की कीमतों में काफी उछाल आने की वजह से पिछले दो साल में 10 रुपये किलो दूध के दाम बढ़ाए गए हैं। हालांकि, ये भी नाकाफी हैं। मगर ज्यादा दाम बढ़ाएंगे तो लोग विरोध करना शुरू कर देते हैं।
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ये बोले पशुपालक
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झांसी का चारा मुरैना की गत्ता फैक्ट्री भेजा जा रहा है। इसलिए भूसे के दाम दो साल में दोगुने हो गए हैं। इस पर तुरंत रोक लगे। कई पालक भैंस बेच रहे हैं। कुछ समय पहले तक तो हमें अपनी भैंसों को गन्ना खिलाना पड़ा। - गुलशन यादव।
मेरे पास पहले 10 भैंस थीं। मौजूदा समय में छह बची हैं। लगातार भूसा, जौ और खल की कीमतों के बढ़ने की वजह से भैंसों को खिलाना मुश्किल हो रहा था। इसलिए चार बेचनी पड़ गईं। इतना महंगा भूसा पहली बार हुआ है। - भूपेंद्र सिंह, सिमरधा।
दो साल पहले जहां एक गाय या भैंस के चारे पर खर्च तीन हजार रुपये आता था, वो अब पांच-छह हजार पहुंच गया है। हमारे पर 14 गाय हैं, जिनमें सात दूध नहीं देती हैं। जितना दूध बेचकर कमाते हैं, उतना चारे पर खर्च हो जाता है। ऐसे में पशुओं को लोग बेचे नहीं तो क्या करें। - राजा यादव।
हर भैंस रोज 20 किलो चारा खाती है। कोई डेढ़ तो कोई छह से सात किलो दूध देती है। उम्रदराज भैंस दूध ही नहीं देती है मगर इनके चारे पर भी खर्च होता है। अब दूध बेचकर आय कुछ नहीं हो रही, जेब से और लग जाता है। वह भी पशुओं की संख्या कम करने जा रहे हैं।
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- दिनेश यादव।
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