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अंधियारी जिंदगी में आएगा उजाला

Mon, 16 Jan 2017 12:54 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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अंधियारी जिंदगी में आएगा उजाला - फोटो : amar ujala
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आंखों की रोशनी खो चुके लोगों के जीवन में अब महारानी लक्ष्मी बाई मेडिकल कॉलेज उजाला लाएगा। यहां अब कॉर्निया ट्रांसप्लांट हो सकेगा। इसके लिए पैकीमीटर कॉर्निया मशीन खरीद ली गई है। साथ ही आंख में काला पानी की जांच के लिए नॉन कांटेक्ट टोलोमीटर मशीन का खरीदी जा चुकी है। फरवरी में मेडिकल कॉलेज के नेत्र विभाग में ये मशीनें काम करने लगेंगी। बीपीएल कार्ड वाले रोगियों को इसका लाभ बिना किसी फीस के मिलेगा।
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मेडिकल कॉलेज में अभी पुरानी पद्धति से काला पानी की जांच होती है। इस कारण जांच सटीक नहीं हो पाती है। साथ ही मरीज को भी जांच में परेशानी होती है, क्योंकि मशीन को आंख के ऊपर रखा जाता है। चूंकि, मशीन कई मरीजों की आंख को छूती है, इससे इंफेक्शन भी हो जाता है। ऐसे में नेत्र विभाग ने कॉलेज प्रशासन से नॉन कांटेक्ट टोलोमीटर मशीन की मांग की थी।

मेडिकल कॉलेज में आई बैंक भी जल्द खुल जाएगा। ऐसे में कॉर्निया ट्रांसप्लांट के लिए पैकीमीटर कॉर्निया मशीन की जरूरत थी। कॉलेज की ओर से दोनों मशीनों की खरीद के लिए प्रस्ताव शासन को भेजा गया था। शासन की ओर से प्रस्ताव को हरी झंडी दिखाते हुए बजट भी उपलब्ध करा दिया गया। कॉलेज ने दोनों मशीनों की खरीद भी कर ली है। फरवरी में दोनों मशीनों को आई विभाग को सौंप दिया जाएगा। बीपीएल कार्ड वालों को इस सुविधा का लाभ बिना किसी फीस के मिलेगा, जबकि अन्य को मामूली दरों पर ये सुविधा मिलेगी।
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कॉर्निया की माप करेगा पैकीमीटर
जरूरी नहीं कि हर व्यक्ति के कॉर्निया का आकार एक जैसा हो इसलिए ट्रांसप्लांट से पहले आंख के कॉर्निया की माप का पता होना बेहद जरूरी होता है। पैकीमीटर कॉर्निया मशीन का काम यही होता है। इस मशीन के जरिए कॉर्निया की लंबाई-चौड़ाई पता की जाती है। झांसी में एक दो बार ही कॉर्निया ट्रांसप्लांट हुआ है। अब तो इसके लिए लाइसेंस लेना पड़ता है। मेडिकल कॉलेज ने लाइसेंस के लिए आवेदन कर दिया है।

सेकेंडों में जांच करेगी टोलोमीटर
ब्लड प्रेशर की तरह आंखों का भी दबाव होता है। जब दबाव बढ़ जाता है, तो इसे काला पानी (ग्लूकोमा) कहते हैं। 20 मिलीमीटर तक दबाव को सामान्य माना जाता है। दबाव बढ़ जाता है, तो इसे आंख की नस सहन नहीं कर पाती। लंबे समय तक यह स्थिति होने पर आंख सूख जाती है। इससे धीरे-धीरे रोशनी चली जाती है। फिर वापस नहीं आती। आमतौर पर 40 वर्ष की आयु के बाद यह बीमारी लोगों को होती है। भारत में आंख की रोशनी खो देने वाले मरीजों में 15 फीसदी ग्लूकोमा पीड़ित होते हैं।
ये है कॉर्निया 
आंख का सामने वाला पारदर्शी कांच जैसा हिस्सा कॉर्निया कहलाता है। कॉर्निया की पारदर्शिता और उसके आकार पर नजर की सफाई और पैनापन निर्भर करता है। प्रकाश की किरणें कॉर्निया से होते हुए आंख में प्रवेश करती हैं। लेंस से होते हुए अंत में रेटीना पर फोकस होती हैं। कॉर्निया की सतह पर आंसू एक महीन परत बनाकर रहता है और उसके पोषण के तत्व प्रदान करता है। 


नॉन कांटेक्ट टोलोमीटर से बिना दवा डाले काला पानी की सेकेंडों में जांच होगी। वहीं, कॉर्निया ट्रांसप्लांट में पैकीमीटर कॉर्निया मशीन मददगार साबित होगी। फरवरी में मशीनों का उपयोग शुरू हो जाएगा।
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- डॉ. जितेंद्र कुमार, नेत्र रोग विभागाध्यक्ष, मेडिकल कॉलेज।
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