झांसी। मध्य प्रदेश के दतिया जिले के उनाव कस्बे में स्थित बालाजी मंदिर की चार सौ साल पुरानी परंपरा बदल दी गई है। रविवार के दिन मंदिर के गर्भ गृह में स्थापित सूर्य यंत्र पर जल अर्पित करने पर रोक लगा दी गई है। स्थानीय प्रशासन ने यह फैसला प्राचीन सूर्य यंत्र को सुरक्षित रखने के लिए लिया है।
उनाव में मंदिर की स्थापना सोलहवीं शताब्दी में हुई थी। तब एक चबूतरे पर सूर्य यंत्र स्थापित किया गया था। बाद में झांसी के राजा नारायण राव (नारूशंकर) ने इसे मंदिर का रूप दिया। दतिया के राजा नरेश रावराजा ने सन 1736 से 1762 के बीच मंदिर को भव्य रूप दिया। दतिया स्टेट गजेटियर के अनुसार 1854 में सिंधिया के मंत्री मामा साहब जादव ने मंदिर का और विस्तार कराया। मंदिर के गर्भ गृह के ठीक सामने से पहूज (पुष्पावती) नदी निकली हुई है।
ऐसी मान्यता है कि रविवार के दिन नदी में स्नान के बाद मंदिर में सूर्य यंत्र पर जल अर्पित करने से चर्म रोगों से छुटकारा मिलता है। इसी मान्यता के चलते यहां रविवार के दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। यहां पहुंचने वाले श्रद्धालु नदी में स्नान करने के बाद भीगे बदन मंदिर में पहुंचकर श्री यंत्र पर जल अर्पित करते हैं। लेकिन, अब गर्भ गृह में प्रवेश पर रोक लगा दी गई है। नई व्यवस्था के तहत सूर्य भगवान की प्राचीन प्रतिमा को गर्भ गृह के मुख्य द्वार पर रख दिया गया है। श्रद्धालुओं को इसी पर जल अर्पित करना होगा। सूर्ययंत्र पर जल अर्पित करने पर रोक लगा दी गई है। उल्लेखनीय है कि यह नई व्यवस्था केवल रविवार के दिन ही लागू होगी। शेष दिनों में श्रद्धालु गर्भ गृह के भीतर सूर्य यंत्र पर जल अर्पित कर सकेंगे। ।
संरक्षण के लिए किया बदलाव
लगातार जल चढ़ने से पत्थर के प्राचीन सूर्य यंत्र के क्षरण की संभावना है। यह अपना मूल स्वरूप खोता जा रहा है। यंत्र के संरक्षण के लिए यह व्यवस्था बनाई गई है। रविवार को यहां भारी संख्या में श्रद्धालु आते हैं, जिसकी वजह से रविवार को ही गर्भ गृह में प्रवेश निषेध किया गया है। अन्य दिनों में श्रद्धालुओं की संख्या खासी कम रहती है। वह गर्भ गृह में पहुंचकर सूर्य यंत्र पर जल अर्पित कर सकते हैं।
- ओपी तिवारी, नायब तहसीलदार एवं सचिव मंदिर कमेटी
12 सीसी टीवी कैमरे लगेंगे
बालाजी मंदिर में सुरक्षा के इंतजाम भी किए जा रहे हैं। यहां 12 सीसी टीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं, ताकि मंदिर परिसर में होने वाली हर गतिविधि पर नजर रखी जा सके। इसके अलावा मंदिर में कंट्रोल रूम भी बनाया जा रहा है तथा आपदा प्रबंधन के लिए नदी में दो नाव चलाई जाएंगी।