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45 किमी में दो बार पंक्चर हुई एंबुलेंस, मेडिकल कॉलेज आने से पहले ही थमी महिला की सांसें

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ललितपुर। जिला अस्पताल से गंभीर हालत में महिला को झांसी मेडिकल कॉलेज लेकर आ रही एंबुलेंस 45 किलोमीटर चलने के दौरान दो बार पंक्चर हो गई। दूसरी बार पंक्चर होने पर परिजन महिला को दूसरे साधन से नजदीकी तालबेहट सीएचसी लेकर पहुंचे तो उसकी सांसें थम चुकी थीं। अगर एंबुलेंस बार-बार पंक्चर नहीं होती तो शायद महिला की जान बच जाती।
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जाखलौन के खिरिया मिश्र गांव निवासी शिवानी राजा (27) पत्नी रवि राजा की शुक्रवार को अचानक हालत बिगड़ गई थी। परिजन उसे जिला अस्पताल ले गए, जहां उसकी हालत ज्यादा खराब होने की वजह से डॉक्टरों ने झांसी मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। भाई सुरेंद्र सिंह ने बताया कि शिवानी को 108 एंबुलेंस से लेकर झांसी के लिए रवाना हुए। अभी एंबुलेंस तेरई फाटक पहुंची ही थी कि एंबुलेंस का एक पहिया पंक्चर हो गया। एंबुलेंस चालक ने टायर बदलवाया। इसमें काफी समय लग गया। एंबुलेंस ठीक होने पर मरीज को लेकर झांसी के लिए चल पड़ा। मगर एंबुलेंस चंद किलोमीटर का सफर तय कर पाई थी कि तालबेहट के पास पहुंचकर दोबारा पंक्चर हो गई। महिला की हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी। यह देखकर परिजनों ने एंबुलेंस ठीक होने का इंतजार करना सही नहीं समझा। किसी तरह दूसरे वाहन से नजदीकी तालबेहट सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे। वहां डॉक्टरों ने परीक्षण के बाद महिला को मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
क्या पुराने टायर पर दौड़ रहीं हैं एंबुलेंस
पौन घंटे में दो बार एंबुलेंस खराब होने से कई सवाल उठ खड़े हुए हैं। बताया गया कि 50 से 60 हजार किलोमीटर चलने पर एंबुलेंस का टायर बदलने का नियम है। दो से तीन बार पंक्चर होने पर ट्यूब भी बदल देना चाहिए। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल ये है कि क्या एंबुलेंस काफी पुराने टायर-ट्यूब पर दौड़ाई जा रही है। हर 15 दिन से एक महीने में शेड्यूल सर्विस होती है। तो क्या सर्विस के दौरान इन सब चीजों को सही से नहीं दिया जाता है?
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