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हंसिए-मुस्कुराइए खूबियां बेहिसाब हैं, खुशियों से भरा है हिंदी का पिटारा...

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amar ujala hindi hai hum
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झांसी। जरा हंसिए...। जनाब, हंसने पर भला कहां कोई टैक्स है। खैर, बात हंसी मजाक की नहीं, भाषा की हो रही है। अमर उजाला की ‘हिंदी हैं हम’ मुहिम के तहत हिंदी प्रेमियों से खुली बात हो रही है। वे अपने अनुभव, बेबाक राय दे रहे हैं। उन्हें हम आप तक पहुंचा रहे हैं। पढ़ाई कर रहे युवाओं से लेकर रचनात्मक जगत के स्थापित लोगों ने कहा कि हिंदी भाषा सहज और विराट है। इसमें नौकरी, व्यापार आदि को बढ़ावा देने की खूबियां तो हैं ही, आनंद देने का जबरदस्त माद्दा है। अपनी ही किसी शरारत को याद कर हंसना भूल गए। या किसी दोस्त या परिचित की बात जो आपको ठहाका लगाने पर मजबूर कर दे वो किस्सा। याद कीजिए शक्ति कपूर का आऊ... करना, गोविंदा का ऐ चंद्रमुखी...। इस भाव को, इस अदांज और इससे मिलने वाली हंसी और खुशी का न तो किसी और भाषा में अनुवाद हो सकता है न अहसास। मतलब साफ है खूबियां बेहिसाब हैं, खुशियों से भरा है हिंदी का पिटारा।
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हिंदी में बनावटीपन नहीं, ठहाका लगाकर हंसिए तो सही : प्रिया बाजपेई
बुंदेलखंड विश्वविद्यालय से टूरिज्म में बीबीए कर रहीं प्रिया बाजपेई हिंदी की कायल हैं। उन्होंने बताया कि धीरे-धीरे युवा समझने लगे हैं कि जिंदगी केवल नौकरी तक सीमित नहीं है। हो सकता है कि खास अंदाज में अंग्रेजी बोलकर आपको कॉल सेंटर आदि में नौकरी मिल जाए पर हिंदी आपकी सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक जरूरतों को पूरा करती है। इसमें कोई बनावटीपन नहीं। ठहाके लगाकर हंसने और उस खुशी का जो अहसास होता है क्या किसी और भाषा में संभव है। रोजगार की दृष्टि से भी देखा जाए तो हिंदी में नए-नए अवसर मिल रहे हैं। जरूरत इस बात की है कि हम सभी इन मौकों और मातृभाषा का सम्मान करें। हिंदी को अपनाने से देश में एकता और मजबूती आएगी।
हमारी जड़ें हिंदी में हैं, कभी उनसे अलग नहीं होना चाहिए : नरेन कुमार
मूलरूप से झांसी के शिवाजी नगर निवासी अभिनेता और कवि नरेन कुमार ने बताया कि संकोच तब तक रहता है जब तक कि आप आत्मविश्वास के साथ हिंदी में खुद को प्रस्तुत नहीं करते। जब आप ऐसा करते हैं तो आपको हिंदी और अपनी ताकत का पता चलता है। आप मुकाम हासिल कर लेते हैं। बड़ी तादाद में युवा हिंदी की दम पर अलग-अलग क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। नरेन खुद हिंदी में वेब सीरीज 26/11 में प्रमुख आतंकी का अभिनय कर चुके हैं। कलर्स टीवी पर 2019 में झांसी की रानी शो में भी किरदार निभा चुके हैं। शिल्पा शेट्टी के साथ फिल्म निकम्मा भी पांच जून को रिलीज होनी थी। कोरोना काल के चलते वह उसमें देरी हो रही है। नरेन के अनुसार वो जो कुछ भी हैं हिंदी की बदौलत हैं। किसी ने ठीक कहा है जो अपनी जड़ें छोड़ देता है हल्के से तूफान से उखड़ जाता है। हमारी जड़ें हिंदी में हैं। हमें कभी उनसे अलग नहीं होना चाहिए।
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अमेजन हो या एड फिल्म सब मान रहे हिंदी का लोहा : आरिफ शहडोली
झांसी के रहने वाले अभिनेता, लेखक आरिफ शहडोली ने कहा कि हम हिंदी में जिंदगी जीते हैं। लखनऊ की भारतेंदु नाट्य अकादमी के छात्र रहे शहडोली ने कहा कि उनके बुजुर्गों को हिंदी पर गर्व रहा है। उनके अनुसार उनके नाना कहा करते थे ‘हिंदी भी हमारी है उर्दू भी हमारी है, एक खालिदा खानम, एक राजकुमारी है’ वे उस समृद्ध परंपरा का निर्वाह कर रहे हैं। यही उम्मीद हर देशवासी से भी करते हैं कि वह मातृभाषा को पूरा सम्मान दे। रंगकर्मी आरिफ हिंदी में ही अभिनय और लेखन को समर्पित हैं। अमेजन के लिए पांच किताब लिख चुके हैं। इनमें दो नाटक जगन्नाथ का भात और ‘अ से अविष्कार’ शामिल हैं। साथ ही, मोहम्मद आरिफ से आरिफाचार्य तक, अभिनेता की तैयारी व अन्य भी हैं। इसके साथ ही, आकाशवाणी के लिए भी लेखन किया है। फिल्म एलेक्स हिंदुस्तानी के सहायक लेखक भी रहे। सरकार के लिए कई एड फिल्मों में भी काम किया। चिड़ियाघर नाटक में भी अभिनय किया। हिंदी ने उन्हें सब कुछ दिया।
हिंदुस्तान की पहचान ही हिंदी भाषा है : समीर खान
खाती बाबा के रहने वाले एक्टर, डायरेक्टर समीर खान ने बताया सन 2000 मैं जब मुंबई गया मैंने देखा कि वहां लोग अलग-अलग भाषा बोल रहे हैं। संकोच था कि खुद को कैसे स्थापित करूंगा। हिम्मत कर के ऑडिशन देने गया वहां भी मुझे डर लगा। फिर जब उन्होंने सोहेल खान की फिल्म मैंने दिल तुझको दिया के डायलॉग दिए तो मैने देखा कि ये तो आम हिंदी भाषा है जो हम लोग बोलते हैं। मैं समझ गया कि हिंदी ही एक ऐसी भाषा है जो आपको आपके मान सम्मान और फिल्म इंडस्ट्री में स्थापित होने का मौका देती है। हालांकि मुझे उस फिल्म में रोल नहीं मिला पर प्रोडक्शन में काम का अवसर मिला। फिर अपनी अच्छी हिंदी और कौशल के दम पर मुझे फिल्म कृष्णा कॉटेज और बॉबी देओल रितेश देशमुख की फिल्म बर्दाश्त में प्रोडक्शन में काम मिला। इसके बाद झांसी आकर अपना खुद का प्रोडक्शन खोला। मेरा मानना है की हिंदुस्तान की पहचान ही हिंदी भाषा है’।

प्रिया बाजपेयी। - फोटो : DEHAT

नरेन कुमार। - फोटो : DEHAT

आरिफ शहडोली। - फोटो : DEHAT

समीर खान। - फोटो : DEHAT

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