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हिंदी बेमिसाल, हम सब उसके लाल, नजरिया कॉरपोरेट जगत को भी बदलना होगा

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amar ujala hindi hai hum
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झांसी। हिंदी को उसका स्थान दिलाने के लिए अब युवाओं के व्यवहारिक सुझाव आ रहे हैं। अलग-अलग क्षेत्र में उच्च शिक्षा ग्रहण कर रहे युवाओं ने बताया कि अड़चनें कहां हैं। दरअसल मुनाफे के लिए कॉरपोरेट जगत उत्पादों का विज्ञापन तो हिंदी में कराता है पर ऑफिस कामकाज व अन्य गतिविधि सब अंग्रेजी में होती हैं। ये जकड़नें तोड़नी होंगी। उनका कहना है कि सरकार को भी जिस स्तर पर हिंदी की वकालत करनी चाहिए वो नहीं हो रही है। वो जज्बा हिंदी पखवाड़े तक सिमटा हुआ है। अमर उजाला ‘हिंदी हैं हम’ मुहिम के तहत हिंदी के प्रति सम्मान के लिए हर वर्ग, हर उम्र के सुझावों को साझा कर रहा है। इस पर गर्व करने की सभी अपील कर रहे हैं।
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युवा हिंदी का सम्मान करें और कंपनियां उन्हें माहौल दें : आशुतोष सिंह
बुंदेलखंड विश्वविद्यालय से बीटेक कर रहे आशुतोष सिंह ने कहा कि हिंदी को शिक्षण संस्थानों से लेकर सरकारी दफ्तरों तक सब जगह अनिवार्य कर देना चाहिए। यहां तक कि निजी क्षेत्र की कंपनियां भी आगे आएं और अपने ऑफिसों, कामकाज में हिंदी को बढ़ावा दें। जब वे उत्पाद का विज्ञापन हिंदी में कर सकती हैं। बड़ी-बड़ी हस्तियों से टीवी पर अपनी कंपनी की ब्रांडिंग हिंदी में करा सकती हैं तो उनके कर्मचारियों के हिंदी बोलने, लिखने में क्या परेशानी है। यही मानसिकता तो तोड़नी है। युवा खुद हिंदी का सम्मान करें और कॉरपोरेट जगत उन्हें माहौल दे।
आर्थिक गतिविधियां भी हिंदी में हों, तब बनेगी बात: वंशिका
बुंदेलखंड विश्विद्यालय से टूरिज्म में बीबीए कर रहीं वंशिका ने कहा कि जिस भाषा को बच्चा बिना सिखाए बोलता है वह है हिंदी। आखिर हर बच्चा पहला शब्द मां ही तो बोलता है। उसे भला कौन यह सिखाता है। अब जो भाषा प्रकृति सिखा रही है उसका महत्व कैसे नकारा जा सकता है। जरूरत तो उसे कार्यक्षेत्र, व्यापार में सक्रिय रूप से शुमार करने की है। यहीं, हम लोग पिछड़ रहे हैं। हिंदी जब आर्थिक गतिविधियों का सक्रिय हिस्सा बन जाएगी तब इसे सही मायने में सम्मान मिलेगा। अभी आलम यह है कि हिंदी का सम्मान हिंदी पखवाड़े तक सिमटा हुआ है। पर्यटन के क्षेत्र में भी हिंदी में अपार संभावनाएं हैं।
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भूगोल से एमए के बाद हिंदी में स्नातकोत्तर किया, इसमें ही शिक्षिका बनी : भावना चतुर्वेदी
केंद्रीय विद्यालय क्रमांक 3 की हिंदी शिक्षिका भावना चतुर्वेदी ने कहा कि हिंदी हमें एकता के सूत्र में जोड़ने वाली भाषा और एक दूसरे के प्रति स्नेह और प्रेम की अभिव्यक्ति का सर्वाधिक सशक्त माध्यम है। यह मन को छू लेने में सक्षम है। हिंदी के बिना हम अपने मनोभावों को प्रदर्शित करने में असहज महसूस करते हैं। हिंदी जहां हमें मां जैसा अपनापन देती है वहीं हमारे लिए सफलता के अनेकों द्वार खोलती है। भूगोल विषय से स्नातकोत्तर होने के बाद मैंने अपने हिंदी प्रेम को और विस्तार देने के लिए हिंदी विषय से स्नातकोत्तर की परीक्षा पास की और हिंदी शिक्षण को ही अपनी जीविका का माध्यम बनाया। हिंदी शिक्षक कहलाने पर मुझे गर्व की अनुभूति होती है। आज के युवा हिंदी अपनाकर बाजार, व्यवसाय, मनोरंजन, विज्ञापन और भी अनेक क्षेत्रों में अपना वर्चस्व स्थापित कर रहे हैं क्योंकि हिंदी भाषा किसी प्रकार का भ्रम उत्पन्न नहीं करती। बड़ी ही सरल और सहज है, जैसी बोली जाती है वैसे ही लिखी भी जाती है। एक सागर की तरह सभी भाषा के शब्दों को अपने में समाहित कर लेती है। हिंदी हमारी संस्कृति की आत्मा है जो आज पूरे विश्व में हमारी पहचान है और हमारे विचारों को सुदृढ़ नींव प्रदान करती है। हम सभी मातृभाषा पर गर्व महसूस करें।
हिंदी बोलने और इस पर गर्व करने में कतई संकोच न करें : कमलेश कुशवाहा
झांसी निवासी कमलेश कुशवाहा ने बताया पिछले कई वर्षों से वे फिल्मी दुनिया में फोटोग्राफी कर के नाम कमा रहे हैं। अब तक मुंबई में कई बड़ी सेलिब्रिटी के फोटोशूट कर चुके हैं। साथ ही, कई ईवेंट, अवार्ड शो के लिए काम किया है। शुरू से अब तक मैं अपनी मातृभाषा हिंदी को ही महत्व देता आया हूं। हिंदी सिनेमा के माध्यम से हिंदी को बुलंदियां छूते हुए देखना अच्छा लगता है। मुझे भी फोटोग्राफी की कुशलता के साथ हिंदी भाषी होने का फायदा मिला। काम के दौरान काफी सहजता जो रहती है। मैं सभी से और खास कर नई पीढ़ी से अपील करता हूं कि वे हिंदी बोलने और इस पर गर्व करने में किसी तरह का कोई संकोच न करें।

वंशिका। - फोटो : DEHAT

आशुतोष सिंह। - फोटो : DEHAT

भावना। - फोटो : DEHAT

कमलेश कुशवाहा। - फोटो : DEHAT

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