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उपलब्ध पानी का भी होगा बंटवारा

Wed, 10 Feb 2016 12:37 AM IST
ब्यूरो
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झांसी। पेयजल महा योजना का पहला चरण शहरवासियों को खुशी कम, परेशानी ज्यादा देगा। जल निगम ने पहले चरण की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर ली है। इस रिपोर्ट के मुताबिक पहले चरण में शहर के विस्तारित क्षेत्रों में पाइप लाइन डालने व नई टंकियां बनाने का काम होगा। इस कार्य के पूरा होने पर अभी जो पानी माताटीला से शहर को मिल रहा है, उसका बंटवारा कर नए क्षेत्रों में दिया जाएगा।
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महानगर में बढ़ती जनसंख्या के हिसाब से पानी की मांग भी बढ़ती जा रही है। जल निगम ने इस समस्या से निजात पाने के लिए यूनिक इंफ्रास्ट्रक्चर सिस्टम (स्माल एंड मीडियम टाउन) कार्यक्रम के तहत संशोधित 800 करोड़ का प्रोजेक्ट तैयार किया है।

विगत माह केंद्र सरकार ने अटल पुनरोद्धार व परिवर्तन मिशन ‘अमृत’ योजना के तहत झांसी पेयजल महायोजना के पहले चरण के लिए 224 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत कर दिया था। पहले चरण की योजना को पूर्व करने के लिए जल निगम ने संशोधित डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार कर ली है।
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जल्द ही जल निगम के उच्च अधिकारी इस योजना की फाइनल ड्राफ्टिंग कर लेंगे। माह के अंत तक रिपोर्ट को स्वीकृति के लिए मुख्यालय भेज दिया जाएगा। पहले चरण में महानगर को 28 जोनों में बांटकर नई टंकियां बनाने व नए क्षेत्रों में पाइप लाइन बिछाने का काम होना है।

दूसरे चरण में माताटीला से नई राइजिंग बनाने का काम होगा। दूसरा चरण पूरा होने तक अभी जो पानी माताटीला से शहरवासियों को दिया जा रहा है, उसी पानी का बंटवारा कर नए क्षेत्रों को देने की योजना है। इस व्यवस्था से आने वाले समय में जिन शहरवासियों को अभी पुरानी पाइप लाइन से पानी मिल रहा है, उनकी परेशानी और बढ़ना तय है।

क्योंकि, अभी जो पानी माताटीला से मिल रहा है, गर्मियों के दिनों में वह पुराने क्षेत्रों को ही संतृप्त नहीं कर पाता है। ऐसी स्थिति में यह महायोजना दूसरा चरण पूरा होने से पहले तक खुशी कम परेशानी अधिक देने वाली है।  

पहले चरण में यह होंगे काम
योजना के पहले चरण में नगर निगम क्षेत्र को 28 जोनों में बांटकर चौबीस नई टंकियां बनाई जाएंगी। नरसिंह राव टौरिया पर 1300 किलोलीटर, दरीगरान में 1600 किलोलीटर, खंडेराव गेट पर 2200 किलोलीटर, सागर गेट पर 800 किलोलीटर, तालपुरा में 2200 किलोलीटर, पुराने बस स्टैंड पर 2000 किलोलीटर, खुशीपुरा में 1800 किलोलीटर, सिविल लाइन में 5000 किलोलीटर, सीपरी बाजार में 400 व 900 किलोलीटर, मसीहागंज में 2350 किलोलीटर, आयुर्वेदिक कालेज जोन में 2500 किलोलीटर, खातीबाबा पर 1000 व 1800 किलोलीटर, सिलवटगंज में 3300 किलोलीटर, प्रेमनगर में 2600 व 450 किलोलीटर, पुलिया नंबर नौ में 2700 किलोलीटर, लहरगिर्द में 2000 किलोलीटर, हंसारी में 2800 किलोलीटर, सिमरधा में 750 किलोलीटर, कोछाभांवर में 1100 किलोलीटर, भगवंतपुरा में 300 किलोलीटर, मेडिकल कालेज पर 2000 किलोलीटर, नंदनपुरा में 1750 किलोलीटर, बिजौली में 1500 किलोलीटर और सिमराहा में 300 किलोलीटर की टंकी बनाई जाएगी। साथ ही महानगर के उन सभी क्षेत्रों में पाइप लाइन डाली जाएगी, जहां के बाशिंदे अभी हैंडपंप व बोरिंग के पानी पर निर्भर हैं।

दूसरे चरण में माताटीला बांध के निकट एक इनटेक वैल कम पंप हाउस का निर्माण होगा। माताटीला से 1600 मिलीमीटर व्यास की एक पाइप लाइन बबीना जल शोधन केंद्र तक लाई जाएगी। बबीना जल शोधन केंद्र पर 210 एमएलडी का नया फिल्टर प्लांट बनाया जाएगा। यहां से 1500 मिलीमीटर की लाइन बिजौली तक व बिजौली से 1400 मिली मीटर की पाइप लाइन महानगर तक लाई जाएगी। तीसरे चरण में घरों में मीटर लगाने आदि कार्य होंगे।

माताटीला से अभी यह मिलता है पानी
 महानगर में एक लाख से अधिक मकान हैं, जिनमें से सिर्फ पचास हजार मकानों तक जल संस्थान की पाइप लाइन पहुंची है। आबादी पर गौर करें तो यहां कम से कम 83.82 एमएलडी पानी की जरूरत है, लेकिन आपूर्ति इससे काफी कम 63.45 एमएलडी की हो रही है। यह स्थिति सामान्य दिनों की है।

बात गर्मी की करें तो तब हालात बेकाबू ही नजर आते हैं। जल निगम के दावों के अनुसार झांसी नगर को माताटीला बांध से मिलने वाले कच्चे पानी को बबीना में शोधित करने के उपरांत 40 एमएलडी व 110 एमएलडी क्षमता की दो पाइप लाइनों से 75.45 एमएलडी पानी दिया जा रहा है। बाकी पानी की पूर्ति पहूज बांध, ट्यूबवेल व अन्य स्रोतों से पूरी होती हैं।
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