झांसी। जिले व आसपास क्षेत्रों में बह रही नदियों पर बने तमाम पुल व रिपटों पर मौत का खतरा है। ये ऐसे पुल हैं, जहां सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं हैं। न तो रेलिंग है और न ही कोई संकेतक लगा हुआ है। सैकड़ों लोगों की अब तक मौत हो चुकी है, लेकिन इन खतरनाक पुलों की ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है।
जिले में 108 छोटे-बड़े पुल (रपटा मिलाकर) बने हुए हैं। इनमें 28 पुल व रपटे ऐसे हैं, जिनमें सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं हैं। लंबे समय से यहां पर रेलिंग व बेरीकेडिंग तक नहीं लगाई गई। इससे हर समय यहां मौत का खतरा बना हुआ है। आए दिन हादसे होने के बाद भी प्रशासन आज तक नहीं चेता। दो दिन पहले टोड़ीफतेहपुर की पथराई नदी में कार गिरने से दो लोगों की मौत के बाद ग्रामीण रेलिंग बनवाने की मांग उठाने लगे हैं।
बस पलटने से 80 यात्रियों की हुई थी मौत
मध्य प्रदेश के ओरछा में जामनी पुल सबसे ज्यादा जानलेवा है। वर्ष 1980 में सवारियों से भरी एक बस झांसी से टीकमगढ़ जाते समय जामनी बांध में गिर गई थी। मौके पर 80 लोगों की मौत हो गई थी। हादसे के बाद पुल पर रेलिंग बनाने की मांग ने जोर पकड़ा था, लेकिन मांग अब तक पूरी नहीं हो सकी। साल 1995 में टीकमगढ़ के जिला सहकारी बैंक के मैनेजर बाधवानी टीकमगढ़ लौटते समय पुल करते समय जीप समेत बह गए थे। आज तक उनका पता नहीं चल सका। क्षेत्र के कई लोग बहकर लापता हो चुके हैं।
नंबर 1
ओरछा के जामनी नदी पर बने पुल की हालत बद से बदतर होती जा रही है। 5 जनवरी की रात पुल पर स्टेयरिंग फेल होने के चलते अनियंत्रित कार नदी मेें गिर गई थी। इससे तीन लोगोें की मौत हो गई थी। यहां आए दिन हादसे होने के बाद सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं किए।
नंबर 2
रक्सा क्षेत्र में सारमऊ से निकली सिद्धेश्वर नदी के रपटा पर कोई इंतजाम नहीं हैं। दोनों तरफ कोई रेलिंग नहीं है। रेलिंग न होने के कारण यहां पर कई बार हादसे हो चुके हैं। दो साल पहले गांव के रहने वाले मूलचंद्र अहिरवार की गाड़ी सीधे नदी में गिर गई थी। इससे मौके पर ही उनकी मौत हो गई थी। हादसों के बाद भी प्रशासन ने कोई सबक नहीं लिया। ग्रामीण कई बार रेलिंग लगाने की मांग उठा चुके हैं।
नंबर 3
समथर में पहाड़पुर स्टेट नहर पुल की रेलिंग जगह-जगह से टूटी पड़ी है। इस मार्ग से हर समय वाहनों का निकलना लगा रहता है। 28 दिसंबर 2020 को ग्राम सजोखरी के पास बेतवा नहर पुल पर रेलिंग पर एक कार लटक गई थी। इस गाड़ी में पांच लोग सवार थे। लोगों की मदद के चलते सभी की जान बच गई थी। लेकिन, ऐसे हादसे यहां जब चाहे हो जाते हैं। लोगों ने पांच फुट की रेलिंग व जाली लगाने की मांग की है।
नंबर 4
ओरछा नदी पर बने रपटा पर भी कोई रेलिंग नहीं है। एक बार में एक ही बड़ी गाड़ी निकल पाती है। ऐसे में यहां भी हर समय हादसे का खतरा बना रहता है। भारी वाहन के निकलने पर बाइक निकलना भी मुश्किल हो जाता है। सातार नदी के पुल पर निर्माण कार्य करा दिया गया है। यहां नया पुल भी बना दिया गया है। लेकिन, रेलिंग जो लगाई गई हैं वह काफी कमजोर है। कोई भी वाहन से टक्कर लगने के बाद वह सुरक्षित नहीं है।
नंबर 5
पूंछ- समथर मार्ग पर चितगुवां के पास बेतवा नहर के पुल पर भी आज तक रेलिंग नहीं लग सकी। बरसात में यहां कई बार हादसे हो चुके हैं। कई ग्रामीण भी बह गए, लेकिन स्थिति आज भी जस की तस है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द ही उनकी समस्या दूर नहीं हुई तो वह इसके लिए आंदोलन भी करेंगे।
जल्द ही इन पुलों और रपटों पर संकेतक लगवाने के साथ ही स्पीड ब्रेकर भी बनवाए जाने हैं। साथ ही बेरीकेडिंग लगवाने के लिए संबंधित विभाग को पत्र भी लिखा जाएगा।
सत्येंद्र कुमार, एआरटीओ