झांसी मेडिकल कॉलेज में महिला मरीज को बिना वार्ड बॉय के एक्स-रे के लिए भेजने का मामला उजागर हुआ। महिला के नौ वर्षीय बेटे को खून की थैली पकड़नी पड़ी। सपा नेता अखिलेश यादव की पोस्ट के बाद यह मामला राजनीतिक तूल पकड़ गया।
झांसी मेडिकल कॉलेज में एक महिला मरीज के साथ हुई लापरवाही का मामला मंगलवार को राजनीतिक रंग ले गया। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर फोटो साझा कर उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री पर निशाना साधते हुए 'नामपट्टी तक सीमित' टिप्पणी की।
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मामला छतरपुर निवासी शकुंतला नायक का है, जिन्हें आंत के संक्रमण के कारण तीन मई को मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में भर्ती किया गया था। उन्हें वार्ड नंबर-2 में बेड नंबर-3 पर रखा गया। आठ मई को खून चढ़ाने के दौरान उन्हें एक्स-रे के लिए रेडियोलॉजी विभाग भेजा गया। इस दौरान उनके साथ वार्ड बॉय नहीं था। शकुंतला के नौ वर्षीय बेटे सौरभ को खून की थैली पकड़ने को कहा गया, जबकि परिजनों को स्ट्रेचर खींचना पड़ा।
मामले में प्राचार्य डॉ. मयंक सिंह ने एसआईसी डॉ. सचिन माहुर से जांच कराई। जांच के आधार पर सिस्टर इंचार्ज सोनिया कासिफ और स्टाफ नर्स पुष्पा को नोटिस जारी कर वेतन रोकने का आदेश दिया गया। आउटसोर्स स्टाफ नर्स पूजा भट्टा और चतुर्थ श्रेणी कर्मी लक्ष्मी की सेवाएं समाप्त कर दी गईं, जबकि नियमित चतुर्थ श्रेणी कर्मी रोशन को निलंबित किया गया।
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मंगलवार को अखिलेश यादव की पोस्ट के बाद मामला सुर्खियों में आया, जिससे मेडिकल कॉलेज प्रशासन में हड़कंप मच गया। प्रशासन ने अन्य कर्मियों की भूमिका जांचने के लिए सीसीटीवी फुटेज की जांच शुरू कर दी है।