झांसी। बुंदेलखंड में मूंग के लिए शिखा, विराट, वर्षों और कनिका प्रजाति सबसे उपयुक्त हैं। 15 अगस्त तक मूंग की बुवाई किसानों को हर हाल में कर देनी चाहिए। रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय की तरफ से किसानों को यह जानकारी दी गई है।
कृषि विश्वविद्यालय के प्रसार शिक्षा निदेशक डॉ. एसएस सिंह, डॉ. विष्णु कुमार ने बुंदेलखंड में खरीफ ऋतु के लिए मूंग की उत्पादन तकनीक और उन्नत किस्मों की महत्वपूर्ण जानकारी किसानों को दी। उन्होंने बताया कि मूंग की बुवाई बलूई दोमट अथवा दोमट मिट्टी अधिक उपयुक्त होती है, जिसमें पानी के निकाय की उचित व्यवस्था होती है। मूंग की बुंदेलखंड क्षेत्र के लिए शिखा, विराट, वर्षों और कनिका प्रजाति सबसे उपयुक्त हैं। डॉ. अंशुमान सिंह और डॉ. निशांत भानू ने मूंग की बुवाई के लिए 25 जुलाई से 15 अगस्त तक के समय को सबसे उपयुक्त बताया। कहा कि मूंग की बुवाई 20 जुलाई से पहले न करें, क्योंकि उन्नतशील प्रजातियां 65-70 दिनों में पक जाती हैं तथा फली के परिपक्व होने की स्थिति में बरसात होने पर बीज फली में ही अंकुरित अथवा सड़ जाते हैं। इससे बीच का रंग और गुणवत्ता में कमी होता है। पैदावार में भी भारी गिरावट आती है। मूंग के बीज को 5-6 किलोग्राम प्रति एकड़ की दर से कतारों की दूरी 30 सेंटीमीटर और पौधों से पौधों की दूरी 10 सेंटीमीटर रखकर 4-6 सेंटीमीटर की गहराई पर बोएं। बुवाई के पूर्व बीज को 2.5 ग्राम थीरम या ढाई ग्राम डायथेन एम-45 प्रति किलो बीज के मान से उपचारित करें। खेत में उर्वरक के लिए 16 किलोग्राम यूरिया, सौ किलो एसएसपी, दस किलोम्यूरेट ऑफ पोटाश प्रति एकड़ अंतिम जुलाई के समय खेत में मिला देना चाहिए।