झांसी। कुपोषण को जड़ से मिटाने के उद्देश्य से पोषण माह चलाया जा रहा है। इसके तहत बृहस्पतिवार को जनपद के 1379 आंगनबाड़ी केंद्रों पर बाल सुपोषण उत्सव व बचपन दिवस धूमधाम से मनाया गया। इसमें बच्चों का जन्मदिवस और व्यंजन आदान -प्रदान करने वाली पार्टियों का आयोजन हुआ।
जिला कार्यक्रम अधिकारी नरेंद्र सिंह ने बताया कि एक सितंबर को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पोषण माह के शुभारंभ पर बाल सुपोषण उत्सव की शुरुआत की थी। इसके अंतर्गत निर्धारित तिथियों पर बच्चों को सामूहिक भोज कराया जाना है। शहरी क्षेत्र के आवास विकास आंगनबाड़ी केंद्र पर बाल सुपोषण उत्सव धूमधाम से मनाया गया। सारी माताएं उत्सव के लिए केंद्र पर तरह-तरह के पौष्टिक व्यंजन बना कर लाई। केंद्र पर पंजीकृत बच्चे चंचल, समर्थ और सत्यम का जन्मदिन भी मनाया गया। स्वस्थ भारत प्रेरक कृति जैन ने बताया कि शिशु के 6 माह पूरे होने पर उसे ऊपरी आहार देना शुरू कर दें। इस अवस्था में बच्चे का विकास बहुत तेजी से होता है और इसके लिए उसे अतिरिक्त ऊर्जा की जरूरत होती है, जो केवल स्तनपान से संभव नहीं है। छह से आठ माह के शिशु को घर का बना हुआ ताजा एवं अर्द्ध ठोस आहार मसल कर दिन में आधी कटोरी कम से कम दो से तीन बार दें। तरल भोजन नहीं देना है। उसमें एक चम्मच घी या तेल के साथ मूंगफली व भुने चने का पाउडर भी डाल सकते हैं। इसके साथ 9 से 11 माह के शिशु को दिन में तीन से चार बार पैनी कटोरी एवं एक-दो बार पौष्टिक नाश्ता दें। 12 से 24 माह के शिशु को स्वयं अलग थाली या कटोरी में भोजन करने के लिए प्रेरित करें।
बीमार शिशु के भोजन में रखें ख्याल
- बीमार शिशु को भोजन कराना बंद न करें, उसे थोड़ा-थोड़ा भोजन जरूर दें।
- बीमारी से बच्चा कमजोर हो जाता है, अत: ठीक होने पर उसके खाने की मात्रा बढ़ा दें।
- शिशु को स्तनपान भी जारी रखें। इस दौरान शिशु का पसंदीदा आहार ही दें।
अनिच्छा से खाने वाले शिशु को ऐसे कराएं भोजन
- जब शिशु को भूख लगे तभी खिलाएं।
- भोजन को बदल-बदल कर दें।
- खाना खिलाते समय जबरदस्ती न करें।
क्या कहते हैं आंकड़े
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे-4 वर्ष 2015-16 की रिपोर्ट के हिसाब से जनपद में स्तनपान करने वाले 6 से 23 माह के 10.9 प्रतिशत बच्चों को ही पर्याप्त पूरक आहार मिलता है।