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कोरोना से ठीक होने के बाद भी पुराने लेवल पर ऑक्सीजन पहुंचने में लग रहा एक महीना

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कोरोना को तो मात दे चुके लोगों का हफ्तों बाद भी नहीं सुधरा आक्सीजन लेवल, 500 से ज्यादा का चल रहा इलाज
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झांसी। कोरोना का नया स्ट्रेन मरीजों को न सिर्फ अस्पताल, बल्कि घर लौटने के बाद भी चिंतित किए हुए है। कई ऐसे मरीज हैं, जिनकी डिस्चार्ज होने के बाद भी ऑक्सीजन लेवल 90 के नीचे चला गया। एक से डेढ़ महीने बाद भी वह पुराने ऑक्सीजन लेवल तक नहीं पहुंच पाए हैं। कइयों को घरों पर ही बीच-बीच में सिलिंडर या कंसंट्रेटर से ऑक्सीजन की जरूरत पड़ी।
कोरोना की दूसरी लहर में ठीक होने वाले लोगों की समस्याएं कम नहीं हो रही हैं। दूसरी लहर में कोरोना का नया स्ट्रेन बेहद खतरनाक साबित हुआ है। यह तेजी से लोगों के फेफड़ों पर असर डाल रहा है। इससे कोरोना को मात देकर ठीक हो चुके कई लोगों को पूरी तरह रिकवरी में भी काफी समय लग रहा है। हाल ये है कि कई मरीजों को तो अस्पताल से ऑक्सीजन लेवल 90 होने पर भी डिस्चार्ज कर दिया गया। ऐसे में कुछ लोगों ने घर पर ही ऑक्सीजन कंसंट्रेटर और सिलिंडर रख रखे हैं। इसकी मदद से वो ऑक्सीजन लेवल डाउन होने पर प्राणवायु ले लेते हैं। ज्यादातर ये समस्या वेंटीलेटर या लंबे समय तक ऑक्सीजन पर रहे मरीजों में देखने को मिल रही है। हालांकि, डॉक्टरों का कहना है कि धीरे-धीरे ऑक्सीजन लेवल सुधरता है। ऐसे में कोरोना से ठीक हो चुके लोग घर पर ही अपना ऑक्सीजन लेवल बीच-बीच में जांचते रहें। किसी तरह की दिक्कत होने पर तुरंत चिकित्सीय परामर्श लें।
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न्यू राजगंज निवासी रामकुमार शुक्ला को कोरोना पॉजिटिव होने के बाद हालत बिगड़ने पर परिजनों ने 13 अप्रैल को मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया था। पहले ही दिन उनका ऑक्सीजन लेवल गिरकर 44 प्रतिशत पहुंच गया। वह मधुमेह से भी पीड़ित हैं। हालांकि, धीरे-धीरे उनकी सेहत सुधरने लगे। 88 से 90 ऑक्सीजन लेवल होने पर 28 अप्रैल को उन्हें डिस्चार्ज करा दिया गया। उन्होंने बताया कि डिस्चार्ज होने के बाद भी उनकी ऑक्सीजन कभी-कभार 88 प्रतिशत तक पहुंच जाती थी। अब एक महीने बाद 95-96 प्रतिशत तक पहुंची है।
सीपरी बाजार निवासी विकास कुमार 11 अप्रैल को कोरोना की चपेट में आ गए थे। उनका ऑक्सीजन लेवल गिरकर 82 प्रतिशत तक पहुंच गया। अस्पतालों में बेड की कमी होने की वजह से उन्होंने घर पर ही ऑक्सीजन सिलेंडर मंगवा लिया। हालांकि, कुछ समय बाद तबीयत ज्यादा बिगड़ी तो मेडिकल कॉलेज में भर्ती हो गए। वहां 90 प्रतिशत ऑक्सीजन स्थिर होने पर डिस्चार्ज कर दिया गया। विकास ने बताया कि वैसे तो उनकी ऑक्सीजन 92-93 प्रतिशत रहती है मगर कभी-कभार घटकर 85 प्रतिशत भी पहुंच जाती है।
महेंद्रपुरी कॉलोनी निवासी गीता 23 अप्रैल को कोरोना संक्रमित हो गई। नौ दिन बाद उनका ऑक्सीजन लेवल 90 पर पहुंच गया तो परिजनों ने एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया। अस्पताल में भी पहले दिन ऑक्सीजन लेवल गिरकर 85 फीसदी हो गया। डॉक्टरों ने ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा। लगभग दो सप्ताह तक अस्पताल में भर्ती रहने के बाद 92 फीसदी ऑक्सीजन लेवल होने पर उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया। वहां से घर आने के बाद कभी-कभी उनका ऑक्सीजन 90 प्रतिशत तक पहुंचा। हालांकि, अब 96 फीसदी बना हुआ है।
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ये ध्यान दें
- घर पर ऑक्सीजन लेवल चेक करते रहें
- सांस लेने में दिक्कत हो तो डॉक्टर को दिखाएं
- जरूरत हो तो अस्पताल में भर्ती होकर इलाज कराएं
पिछली बार की तुलना में इस बार का स्ट्रेन काफी अलग है। संक्रमितों के फेफड़ों पर तेजी से असर डाल रहा है। ऐसे में गंभीर मरीजों को भी लंबे समय तक ऑक्सीजन सपोर्ट की जरूरत पड़ रही है। मरीजों की 90 प्रतिशत पर ऑक्सीजन स्थिर और हालत गंभीर न होने की स्थिति देखते हुए उनकी ही मांग पर घर भेजा गया, क्योंकि माहौल बदलने से भी रोगियों की सेहत सुधरी। - डॉ. पारस गुप्ता, सहायक नोडल अधिकारी, कोविड, मेडिकल कॉलेज।
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