खाने-पीने की चीजों में हो रही मिलावट से मसाले भी अछूते नहीं हैं। सब्जियों को स्वादिष्ट बनाने के लिए ब्रांडेड से लेकर खुदरा बिकने वाले मसालों में धड़ल्ले से मिलावट का खेल चल रहा है। थोड़े से मुनाफे के चक्कर में दुकानदार लोगों को बीमारियां परोस रहे हैं। शहर की थोक और खुदरा मंडियों में हल्दी, धनिया, जीरा से लेकर काली मिर्च तक में घालमेल किया जा रहा है, लेकिन मिलावटखोरों के खिलाफ अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
मसाले खाने के साथ ही स्वाद को बढ़ा देते हैं, लेकिन इस स्वाद में मिलावटखोराें ने तगड़ी सेंध लगाई है। मसालों में लकड़ी से लेकर ईंट का बुरादा मिला रहे हैं, जो खाने के स्वाद को फीका करता है और सेहत को नुकसान पहुंचाता है। मिलावटखोर इतनी सफाई से मिलावट करते हैं कि उसे आसानी से नहीं जान पाते हैं।
मसालों में सबसे ज्यादा उपयोग होने वाली हल्दी, मिर्च, धनियां, काली मिर्च, जीरा आदि में अत्यधिक मिलावट की जा रही है। हल्दी को ज्यादा चमकीला बनाने के लिए लेड क्रोमोट की मिलावट किया जाता है, इसके पाउडर में पीला रंग व चॉक पाउडर मिलाया जाता है। मिर्च की पाउडर में भी हानिकारक रंग की मिलावट होती है। धनिया व जीरा पाउडर में धान की भूसी और लड़की के कुन्नी का प्रयोग किया है।
अन्य मसालों में भी अरवा चावल की खुद्दी, चना का छिलका, पत्तियों के डंठल आदि का प्रयोग किया जाता है। आमलोगों के लिए यह पकड़ना मुश्किल है। इस मिलावट के कारण लोग पेट सहित कई अन्य गंभीर बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। वहीं, हींग में भी अरारोट मिलाकर मिलावट की जा रही है।
अरारोट में तो महक होती नहीं, लिहाजा उसमें हींग की खुशबू वाला रसायन मिला दिया जाता है। इस मिलावट से हींग बहुत उम्दा किस्म की मालूम पड़ती है, लेकिन कुछ समय बाद रसायन की महक उड़ कर खत्म हो जाती है, लेकिन उसका नुकसान बरकरार रहता है।
कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा
महज कुछ रुपये के फायदे के लिए की गई मिलावट हमारी जिंदगी के लिए घातक बन सकती है। वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. रविकांत वर्मा ने बताया कि मिलावटी मसाले के सेवन से कैंसर, दिमागी बुखार, नपुंसकता, हृदयरोग, उच्च रक्तचाप, त्वचा रोग एलर्जी के साथ-साथ नवजात शिशुओं के लिए यह जानलेवा हो सकता है।