एड्स लाइलाज बीमारी जरूर है लेकिन समय पर इलाज शुरू हो जाने से रोगी लंबी उम्र जी सकता है। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में बने एआरटी सेंटर में एड्स रोगियों को नि:शुल्क इलाज होता है। मरीजों को सेंटर आने का प्रति विजिट सौ रुपये भी मिलते हैं।
एड्स एचआईवी वाइरस से होता है। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज के एआरटी सेंटर में अब तक बुंदेलखंड के 1978 एड्स मरीज पंजीकृत हो चुके हैं। इनमें 1572 का इलाज चल रहा है। जबकि, 401 की मौत हो चुकी है। एआरटी सेंटर प्रभारी डॉ. नूतन अग्रवाल ने बताया कि लोगों में जागरूकता आने से पंजीकरण बढ़े हैं लेकिन नए मरीजों की संख्या घट रही है। एड्स मरीज की पहचान जितनी जल्दी हो जाएगी, उतना ही ठीक होगा। तत्काल इलाज शुरू कर देने से विभिन्न प्रकार के संक्रमण से बचाया जा सकता है।
मरीज भी लंबा जीवन गुजार सकता है। समय पर इलाज न होने से मरीज की मौत हो जाती है। उन्होंने बताया कि एआरटी सेंटर में जांच के बाद एड्स रोगी मिलने पर उसकी सूचना गोपनीय रखी जाती है। बुंदेलखंड के अलग-अलग जनपदों में एआरटी के लिंक सेंटर भी बना रखे हैं। लिंक सेंटर पर भी मरीजों को दवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। सेंटर आने पर मरीजों को सौ रुपये भी किराए के मिलते हैं।
एचआईवी को बढ़ाने वाले व्यवहार
- एचआईवी संक्रमित व्यक्ति के साथ असुरक्षित यौन संबंध बनाना
- संक्रमित सुई का प्रयोग करना
- बिना जांच परखा खून चढ़वाना
- संक्रमित मां से उसके होने वाले बच्चे को
एचआईवी से ऐसे बचें
- यौन संबंध बनाते समय कंडोम का प्रयोग करें
- हर बार नई सुई का प्रयोग करें
- हमेशा जांचा परखा खून चढ़वाएं
- मां संक्रमित हो तो प्रसव संस्थागत ही करवाएं
सेंटर में ये होता है
- एड्स मरीजों को नि:शुल्क दवाएं दी जाती
- चार्ट तैयार कर समय अंतराल पर बुलाया जाता
- मरीज की प्रतिरोधक क्षमता कम नहीं होने देते
- असामान्य संक्रमण होने पर दवाएं से ठीक करते
- बार-बार होने वाले संक्रमण को दवाओं से रोक देते
एड्स के लक्षण
- लगातार बुखार आना
- बिना किसी कारण के वजन कम होना
- मुंह में फंगल इंफेक्शन हो जाना
- टीवी का शिकार हो जाना
- मांसपेशियां कमजोर होने लगना
संक्रमित सिरिंज चुभे, तो 48 घंटे के अंदर आएं
डॉ. नूतन ने बताया कि अस्पतालों में सैंपल लेने के दौरान यदि किसी स्वास्थ्य कर्मचारी को एचआईवी मरीज से संक्रमित सिरिंज चुभ जाती है तो 48 घंटे के अंदर एआरटी सेंटर से संपर्क कर ले। प्राथमिक जांच के बाद 28 दिनों के लिए दवाएं दे दी जाती है। इसके बाद पूर्ण रूप से बीमारी का असर खत्म हो जाता है।