चुनाव आचार संहिता का पालन करने के लिए जिलाधिकारी ने अवैध होर्डिंग हटाने के निर्देश दिए हैं। लेकिन, अपर आयुक्त (प्रशासन) ने होर्डिंग नहीं हटाने को कहा है। तर्क है कि विज्ञापन के ठेकों में अनियमितता के आरोप हैं, इनकी जांच के बाद ही इन्हें हटाया जाएगा। ऐसे में नगर निगम धर्मसंकट में फंस गया है। इसी असमंजस में छह फरवरी से अवैध होर्डिंग के खिलाफ चलने वाला अभियान थमा हुआ है।
शहर में अवैध होर्डिंग लगाना कोई नहीं बात नहीं है। ठेकेदारों ने मनमर्जी से जहां जगह पाई वहीं लोहे के एंगल ठोंककर होर्डिंग तान रखी है। इससे न केवल शहर की सूरत बिगड़ती है, बल्कि नगर निगम को राजस्व का नुकसान भी हो रहा है। महानगर के दो सौ स्थानों पर अवैध होर्डिंग लगी हैं। जिलाधिकारी अजय कुमार शुक्ला ने चुनाव आचार संहिता का पालन कराने के लिए अवैध होर्डिंग हटाने के निर्देश दिए थे। उन्होंने अपर नगर मजिस्ट्रेट को दिए आदेश में कहा था कि छह से नौ फरवरी तक अवैध होर्डिंग के खिलाफ अभियान चलाया जाए और इसके लिए नगर आयुक्त से मिलकर समन्वय स्थापित करें।
नगर निगम ने होर्डिंग हटाने की तैयारी कर ली थी लेकिन, अपर आयुक्त प्रशासन उर्मिला सोनकर खाबरी ने नगर आयुक्त को आदेश जारी कर कहा कि नगर निगम द्वारा दिए गए विज्ञापन के ठेके में अनियमितता है। ऐसे में फिलहाल होर्डिंग को नहीं हटाए जाए। सूत्रों के अनुसार अब जांच के बाद ही स्थिति साफ हो सकेगी। अपर आयुक्त के आदेश के बाद नगर निगम धर्मसंकट में फंस गया है कि होर्डिंग हटाए जाएं या नहीं।
अक्तूबर से चल रही जांच नहीं हो सकी पूरी
नगर निगम ने होर्डिंग का ठेका नोएडा की एक कंपनी को दिया है। ठेके में अनियमितता की शिकायत मंडलायुक्त से अक्तूबर 2016 में की गई थी, लेकिन चार महीने बाद भी जांच पूरी नहीं हो सकी है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जांच जब तक पूरी नहीं होगी, तब तक क्या प्रशासनिक कार्य बंद रहेंगे। चुनाव आचार संहिता सबसे अनिवार्य कार्य है, लेकिन इसमें भी अभियान को रोक दिया गया।
नहीं दिया जा रहा जन सूचनाओं का जवाब
होर्डिंग की जांच पूरी नहीं हो पाने से जनसूचना अधिकार अधिनियम के अंतर्गत होर्डिंग से संबंधित सवालों का जवाब नहीं दिया जा रहा है। इस पर अधिवक्ता रामबिहारी बिलगैंया ने नगर निगम को नोटिस दिया है।
कोट
बीच का रास्ता निकालेंगे
नगर आयुक्त से राय लेकर हल निकाला जाएगा, ताकि किसी के आदेश की अवहेलना न हो। विभाग का यही प्रयास है कि चुनाव आचार संहिता और उच्च अधिकारियों के आदेश का पालन हो जाए।
- केशव प्रसाद, होर्डिंग प्रभार, नगर निगम