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औषधीय और सुगंधित पौधों की उन्नत खेती की बारीकियां बताईं

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झांसी। रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय में विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा वित्त पोषित परियोजना के अंतर्गत बुंदेलखंड क्षेत्र में स्वरोजगार सृजन के लिए औषधीय पौधों की खेती को प्रोत्साहन के लिए कृषक वैज्ञानिक परिचर्चा और प्रशिक्षण दिया गया। इस दौरान किसानों को औषधीय एवं सुगंधित पौधों की उन्नत खेती की बारीकियां बताई गईं।
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डॉ. विनोद कुमार ने बाजार व्यवस्था और डॉ. घनश्याम अब्ररोल ने मूल्य संवर्धन पर चर्चा की। निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ. एसएस सिंह ने बताया कि कोरोना काल में आयुर्वेद की मांग तेजी से बढ़ी है। प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए आयुर्वेदिक औषधियों की देश भर में मांग रही है। इस मांग का प्रभाव औषधीय व्यापार पर भी पड़ा है। इसका लाभ औषधीय खेती करने वाले किसानों को मिला है। कोरोना काल में सबसे ज्यादा गिलोय, अणु तेल, च्यवनप्राश, आंवला, एलोवेर, जूस आदि का प्रयोग करने से विशेष लाभ मिला है।
उन्होंने स्वयं सहायता समूह और कृषक उत्पादक संघ बनाकर ई-मंडी से जुड़ने की सलाह दी। अधिष्ठाता कृषि डॉ. एसके चतुर्वेदी ने कृषि औषधीय पौधों की महत्ता पर प्रकाश डाला। डॉ. नीलिमा शर्मा, डॉ. एके पांडेय, डॉ. एआर शर्मा ने किसानों को कई अहम जानकारियां दी। डॉ. मीनाक्षी आर्या ने किसानों का स्वागत किया। विभिन्न गांवों के किसानों ने नवनिर्मित विश्वविद्यालय व फॉर्म का भी भ्रमण किया। कार्यक्रम संयोजक डॉ. अंशुमान सिंह ने आभार जताया।
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