झांसी। रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय में बुंदेलखंड में स्वरोजगार सृजन के लिए औषधीय पौधों की खेती को प्रोत्साहित करने के लिए कृषक वैज्ञानिक परिचर्चा और प्रशिक्षण कार्यक्रम हुआ। इसमें निदेशक शोध डॉ. एआर शर्मा ने क्षेत्र के आर्थिक रूप से कमजोर कृषक समुदायों के प्रयासों की सराहना की। कहा कि वे अपने कौशल को और बढ़ाने के लिए इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रमों का लाभ उठाएं। ताकि, वे कम मगर केंद्रित प्रयासों के साथ अधिक फसलों का उत्पादन कर सकें।
उद्यानिकी एवं वानिकी डॉ. एके पांडे ने सुगंधित पौधों के क्षेत्र में अनुसंधान और विकास गतिविधियों के लिए विश्वविद्यालय की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि बुंदेलखंड क्षेत्र अपनी पहचान, क्षेत्र की औषधीय फसलों की जीआई टैगिंग (भौगोलिक पहचान) दर्ज कराने की क्षमता रखता है। अधिष्ठाता कृषि डॉ. एसके चतुर्वेदी ने बेहतर आय सृजन के लिए औषधीय और सुगंधित पौधों की खेती के महत्व पर प्रकाश डाला। इस दौरान किसानों ने वैज्ञानिकों के साथ बातचीत की और सुगंधित पौधों के प्रसंस्करण, खेती और विपणन के बारे में तकनीकों को सीखा। डॉ. आशीष भरलिया, डॉ. रंजीत पाल, डॉ. घनश्याम अबरोल, डॉ. सुशील सिंह ने औषधीय और सुगंधित फसलों की खेती, रोपण सामग्री का प्रचार, कटाई के बाद के भंडारण, संरक्षण पद्धति, मृदा स्वास्थ्य और किसानों की आय के बारे में बताया। इस मौके पर डॉ. एसएस सिंह, कार्यक्रम आयोजक डॉ. मीनाक्षी आर्या व परियोजना सह समन्वयक डॉ. अंशुमान सिंह मौजूद रहे।