हिंदी के छात्र पढ़ेंगे आल्हा-ऊदल की शौर्यगाथा, राष्ट्रप्रेम की कविताएं
झांसी। ‘बारह बरिस लै कूकर जीएं, औ तेरह लौ जिएं सियार, बरिस अठारह छत्री जिएं, आगे जीवन को धिक्कार।’ ऐसी पंक्तियों का सागर यानी कि जगनिक के आल्हाखंड अब हिंदी के नए एकीकृत स्नातक पाठ्यक्रम में यूनिवर्सिटी और डिग्री कॉलेजों में छात्रों को पढ़ाया जाएगा। इसके अलावा राष्ट्रप्रेम की कविताएं, सिनेमा के गीत के साथ-साथ नए कोर्स को शोधोन्मुखी भी बनाया गया है। 95 फीसदी विश्वविद्यालयों ने इसे स्वीकार भी कर लिया है। अगले शैक्षिक सत्र से सरकार इसे प्रदेश भर में लागू कर सकती है।
नई शिक्षा नीति के तहत हिंदी पाठ्यक्रम में बदलाव के लिए प्रदेश स्तर पर पाठ्यक्रम निर्माण समिति गठित की थी। चार सदस्यीय इस समिति ने मार्च में अपनी रिपोर्ट शासन को सौंप दी थी। अब समिति की रिपोर्ट के आधार पर कोर्स में आवश्यक बदलाव की मंजूरी दे दी गई है। ऐसे में पहली बार हिंदी के पाठ्यक्रम में राष्ट्रीय काव्य और सिनेमा को स्थान दिया गया है। बताया गया कि कोर्स में साहित्य की पारंपरिक विधाओं के साथ-साथ भारतीय संस्कृति की उदात्तता, राष्ट्रप्रेम, रोजगारपरकता, आधुनिक विधाएं, शोध की मूलभूत जानकारी, अनुवाद, राजभाषा के सिद्धांत, कार्यालयी पत्राचार, भाषा विज्ञान, हिंदी भाषा, देवनगरी लिपि, पत्रकारिता, लोक साहित्य, लोक संस्कृति, सृजनात्मक लेखन, कंप्यूटर और सोशल मीडिया जैसे प्रश्नपत्रों को जोड़ा गया है। वहीं, आज की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए हिंदी टाइपिंग, पावर प्वाइंट प्रजेंटेशन, पोस्टर निर्माण, ई-मेल, ब्लॉग, पॉड कास्ट, यूनिकोड, ई-पुस्तकालय, ई-जर्नल, सोशल मीडिया आदि का ज्ञान प्राप्त करेंगे। इसके अलावा वे हर वर्ष एक रोजगारपरक प्रश्नपत्र का अध्ययन करेंगे। ताकि, कभी भी पढ़ाई छोड़ने पर विद्यार्थी कार्य कुशलता हासिल करने में सम रहे। नए कोर्स को इस प्रकार डिजाइन किया गया है कि सरकारी नौकरियों, कॉर्पोरेट जगत की जरूरतों को भी विद्यार्थी पूरा कर पाने में कामयाब हो सकेंगे। ताकि, नौकरी मिलने य फिर खुद का स्टार्ट अप शुरू करने में छात्र सक्षम बन सकें।
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गुरु गोविंद सिंह की शिवा स्तुति, राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त, माखनलाल चतुर्वेदी की पुष्प की अभिलाषा, नवीन और दिनकर की ओजस्वी कविताएं, श्याम नारायण पांडेय का राणा प्रताप की वीरता पर आधारित हल्दीघाटी काव्य, श्यामलाल गुप्ता पार्षद का विजयी विश्व तिरंगा प्यारा से लेकर पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेई की कदम मिलाकर चलना होगा। देश के शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक की हम भारतवासी जैसी राष्ट्रप्रेम की कविताएं छात्र पढ़ेंगे। फिल्मी गीतों में कवि प्रदीप के आज हिमालय की चोटी से हम सबने ललकारा है, ऐ मेरे वतन के लोगों, हम लाए हैं तूफान से कश्ती निकाल के और आओ बच्चों तुम्हें दिखाएं झांकी हिंदुस्तान की जैसे गीत आदि भी पढ़ सकेंगे।
हिंदी के छात्र अब आल्हा-ऊदल की शौर्यगाथा, राष्ट्रप्रेम की कविताएं पढ़ सकेंगे। फिल्मी गीत और पीपीटी तैयार करना भी सीखेंगे। ये कोर्स शोध उन्मुखी है। 95 फीसदी विश्वविद्यालयों ने इसे स्वीकार कर लिया है। अगले सत्र से सरकार इसे प्रदेश भर में लागू कर सकती है। समिति में मेरे साथ गोरखपुर विवि के प्रो. अनिल राय, डॉ. शकुंतला मिश्रा विवि के डॉ. वीरेंद्र सिंह, कानपुर के डीएवी कॉलेज में डॉ. यतींद्र सिंह ने मिलकर नया पाठ्यक्रम तैयार किया है। - डॉ. पुनीत बिसारिया, संयोजक, पाठ्यक्रम निर्माण समिति एवं हिंदी विभागाध्यक्ष, बुंदेलखंड विश्वविद्यालय।