झांसी। आखिरकार महापौर ने जमीन हस्तांतरण संबंधी ‘विभागीय मंशा’ पर पानी फेर दिया। उन्होंने मामलेे को लेकर लिखित बयान पढ़ा और उक्त प्रस्ताव को कड़ाई से रोक दिया। प्रस्ताव पारित होने की स्थिति में एक तो नगर निगम की जमीन मनमर्जी से हस्तांतरित हो जाती, दूसरा नगर निगम की सीमा में शामिल गांवों में फैली पड़ी नगर निगम की जमीन का भी मनमर्जी से उपयोग किया जाने लगता।
सदन की बैठक में जैसे ही मौजा भगवंतपुरा की 0.810 हेक्टेयर भूमि हस्तांतरित करने संबंधी प्रस्ताव आया, पार्षदों ने हंगामा शुरू कर दिया। उनका कहना था कि जब प्रस्ताव कार्यकारिणी की बैठक में गिर चुका था तो इसे सदन की बैठक में क्यों लाया गया। इसका मतलब है कि विभागीय मंशा साफ नहीं है। हालांकि, इस पर नगर आयुक्त अरुण प्रकाश ने काफी तर्क दिए, साथ ही कार्यकारिणी की बैठक के प्रस्ताव का हवाला भी दिया, लेकिन पार्षद उनकी बात मानने को तैयार नहीं हुए। हंगामा बढ़ने पर महापौर किरण राजू बुकसेलर ने कमान संभाली और कहा कि जमीन हस्तांतरण का विषय काफी संवेदनशील है, यह विषय आपत्ति के साथ कष्टदायी भी है। इसके निस्तारण के पहले सम्यक परीक्षण, स्वामित्व का निर्धारण, नियमों के अनुपालन के संबंध में संपूर्ण कार्रवाई के उपरांत ही कोई कार्रवाई किया जाना उचित होगा। उन्होंने कहा कि नगर निगम के स्वामित्व की जमीनों का रिकार्ड तहसील से प्रमाणित कराकर सार्वजनिक किया जाए। जमीनों के आवंटन या पट्टे पर दिए जाने, ट्रांसफर किए जाने के संबंध में तब तक कोई निर्णय नहीं लिया जाए, जब तक कि संपूर्ण रिकार्ड तहसील से प्रमाणित नहीं हो जाए। उन्होंने कहा यदि नगर निगम के स्वामित्व की जमीन रहेगी तो भविष्य में इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए जमीन उपलब्ध कराई जा सकेगी।
उन्होंने चेतावनी भी दी कि विभाग इस प्रकार जमीनों के आवंटन, किराया या ट्रांसफर का प्रस्ताव प्रस्तुत नहीं करे। यदि व्यापक जनहित में जमीन दिया जना आवश्यक है तो भी इसके लिए पांच सदस्यीय अधिकारियों की समिति से संस्तुति कराकर सदन के ग्यारह सदस्यों की समिति से इसका परीक्षण कराया जाए। इसके बाद ही ट्रांसफर पर कोई निर्णय लिया जाए। महापौर के कड़े रुख को देखते हुए नगर निगम में शामिल गांवों की जमीनों को लेकर एक अन्य प्रस्ताव भी ठंडे बस्ते में चला गया।