झांसी। विलुप्त होते नालों के पुनर्जीवन की कोशिशें रंग ला रही हैं। खैलार के पास स्थित जमराहा नाला के गहरीकरण का कार्य जोर पकड़ गया है। जल्द ही नाले का गहरीकरण पूरा होने की उम्मीद है।
वर्षों पूर्व जो नाले बहुत अच्छी स्थिति में थे, कब्जे हो जानेे सेे उनका अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। मुख्य विकास अधिकारी इन नालों को महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) से पुनर्जीवित करने के प्रयास में लगेे हुए हैं। इसी क्रम में खैलार के पास स्थित जमराहा नाला चिह्नित किया गया था। करीब 750 मीटर लंबे इस नाले में बेशरम के बड़े- बड़े झाड़ लगे हुए थे, जिससे पूरा नाला अवरुद्ध हो गया था। सर्वे के दौरान पाया गया कि बेतवा नदी को जोड़ने वाले इस नाले का यदि सही तरीके से उपयोग किया जाए तो इससे लगभग 22 हेक्टेयर क्षेत्रफल के तीस किसानों को सिंचाई सुविधा का लाभ होगा।
इसे ध्यान में रखते हुए नाले के पुनर्जीवन का प्रयास शुरू किया गया। इस पर लगभग 3,99,800 रुपये खर्च का आकलन किया गया। तय किया गया कि नालेे की खुदाई के साथ एक चेकडैम भी बनाया जाएगा। इसके बाद नाले की खुदाई का कार्य शुरू हुआ। नाले की औसत खुदाई करीब एक मीटर की गई। खुदाई का कार्य चल रहा है और 28 जून तक पूरा होने की उम्मीद है।
प्रभारी खंड विकास अधिकारी डा. कौशलेंद्र सिंह ने बताया कि जमराहा नाले की खुदाई का कार्य पूरा होने के बाद चेकडैम बनाया जाएगा। प्रयास है कि 15 जुलाई तक चेकडैम भी बना दिया जाए। नाले की कुछ जमीन पर क्रशर संचालकों का कब्जा है, जिसे हटाने के लिए उपजिलाधिकारी को पत्र लिखा जा रहा है।