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चुभती- जलती गर्मी में राहत देगी खादी

Fri, 16 May 2014 05:30 AM IST
Jhansi
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झांसी। मौसम में तपिश बढ़ने लगी है। आने वाले दिनों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से पार जाने की संभावना है। ऐसे में लोगों ने अपने पहनावे में भी बदलाव करना शुरू कर दिया है। इस मौसम में सूती व खादी से बने वस्त्र सबसे ज्यादा डिमांड में हैं। पहनने में हल्के व ठंडे होने से लोग इन्हें ज्यादा पसंद कर रहे हैं।
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गर्मी के मौसम में टेरीकाट का कपड़ा शरीर में चिपकता है। शरीर से निकलने वाला पसीना नहीं सूखने के कारण त्वचा संबंधी बीमारियां शुरू होने लगती है। ऐसे में हमें अपने पहनावे पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होती है। फैशन को दरकिनार करते हुए स्वास्थ्य को प्राथमिकता देनी चाहिए। ताकि शरीर में होने वाली खुजली व चिपचिपाहट से बचा जा सके। अन्यथा चर्म रोग की बीमारी हो सकती है।

खादी व सूती कपड़ों की दुकानों पर भीड़
झांसी। गर्मी बढ़ने के कारण खादी व सूती कपड़ों की दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ बढ़ने लगी है। दुकानदार भी खासा उत्साहित हैं। ग्राहकों को लुभाने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। श्री गांधी आश्रम खादी भंडार के वस्त्र विक्रेता प्रकाश सिंह के अनुसार ग्राहकों के बजट के हिसाब से खादी में कपड़ों की कई वैराइटियां उपलब्ध हैं, जिसमें सूती का कपड़ा 160 से लेकर 285 रुपये मीटर, पाली मिक्स 165 से 285 रुपये मीटर, सिल्क 500 से लेकर एक हजार रुपये प्रति मीटर है। कुर्ता 340 से लेकर 500 रुपये प्रति पीस, पायजामा 320 से लेकर 450 रुपये प्रति पीस व गमछा सूती व खादी 155 से लेकर 210 रुपये में उपलब्ध है।
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खादी व सूती पहनें, बचें चर्म रोग से
झांसी। त्वचा रोग विशेषज्ञों के मुताबिक गर्मी के मौसम में सूती व खादी वस्त्र शरीर के लिए फायदेमंद है। इस सीजन में शरीर से खूब पसीना निकलता है। टेरीकॉट, टेरीलिन आदि वस्त्र पसीना को नहीं सोखते हैं। इससे शरीर में खुजलाहट होती है और इसे पहनने वाला चर्म रोग का शिकार हो जाता है, जबकि खादी या सूती वस्त्र पसीना को सोखने में सक्षम होता है। बेहतर हो कि गर्मी के सीजन में पसीना सोखने वाले वस्त्रों को ही तरजीह दी जाए।


जिला अस्पताल में बढे़ चर्म रोग के मरीज
झांसी। जिला अस्पताल में चर्म रोग के मरीजाें की संख्या में खासा इजाफा हो गया है। चर्म रोग विशेषज्ञ डा. दीपशिखा सिंह के अनुसार प्रतिदिन 250 मरीज इलाज के लिए आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि खानपान व रहन सहन ठीक नहीं होने से अक्सर त्वचा संबंधी बीमारियां हो जाती हैं। समय पर इलाज नहीं कराया गया तो परिवार के अन्य सदस्यों को भी यह बीमारी होने की संभावना बढ़ जाती है। इस बीमारी से पीड़ित व्यक्ति को अपना तौलिया या रूमाल किसी अन्य को इस्तेमाल के लिए नहीं देना चाहिए।
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खानपान में बरतें सावधानियां
- पानी खूब पीएं
- हरी सब्जियों का अधिक प्रयोग करें।
- सरसों का तेल व साबुन का प्रयोग कम करें।
- मिर्च, मशाला व चाट खाद्य सामग्री से परहेज करें।
- उड़द, बैगन, कटहल, अंडा, नॉनवेज खाने से परहेज करें।
- शरीर पर पाउडर लगाने के बाद ही बाहर निकलें।
- धूप में छाता का प्रयोग करें ।
- गीले कपडे़ से दूर रहें।
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