झांसी। वाणिज्य कर विभाग द्वारा ई रजिस्ट्रेशन तो लागू कर दिया गया, लेकिन इसकी कठिनाइयों का समाधान नहीं किया जा रहा। अधिकारियों को पंद्रह नवंबर से कैंप लगाकर व्यापारियों की समस्याएं दूर करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन यह काम भी अब तक शुरू नहीं हो सका है।
वाणिज्य कर कमिश्नर ने सभी अधिकारियों को ई रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था को सफल बनाने व इसमें आ रही कठिनाइयों को अपने स्तर पर निराकरण करने के साथ पंजीयन प्रमाण पत्र अतिशीघ्र डाक से व्यापारियों तक पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं। लेकिन ई रजिस्ट्रेशन में आ रही कठिनाइयां दूर होने का नाम नहीं ले रही हैं। कई जगह फार्म अपलोड करने की समस्या बनी हुई है। टिन नंबर जनरेट होने के पश्चात भी साफ्टवेयर द्वारा व्यापारी को एसएमएस तथा ई मेल से सूचना प्राप्त नहीं हो पा रही है। केंद्रीय बिक्रीकर अधिनियम के अंतर्गत ई रजिस्ट्रेशन का आवेदन किए जाने की दशा में संलग्नक अपलोड करने की व्यवस्था नहीं है, जिससे आवेदन का शुल्क का चालान तथा यथा आवश्यक जमानत से संबंधित प्रपत्र अपलोड नहीं हो पा रहे हैं। पंजीयन अधिकारी धारा 7(1) अथवा धारा 7(2) के आवेदन पत्र पर ई रजिस्ट्रेशन को स्पष्ट नहीं कर पा रहे हैं। इतना ही नहीं एक ही पैन से जब दूसरा पंजीयन आवेदन किया जाता है तब सिस्टम यह संदेश प्रदर्शित करता है कि इस पैन पर एक फर्म पहले से पंजीकृत है, परंतु फर्म का नाम अथवा उसका विवरण प्रदर्शित नहीं होता है। ई रजिस्ट्रेशन में पांच से अधिक पार्टनर का विवरण आवेदन में लोड नहीं है। ई रजिस्ट्रेशन से संबंधित वेबसाइट पर लंबित आवेदन पत्रों की कुल संख्या प्रदर्शित होती है, इनमें कितने संवेदनशील वस्तु के आवेदन लंबित हैं, यह स्पष्ट नहीं है। ऐसी ही कई अन्य समस्याएं ई रजिस्ट्रेशन में आ रही हैं, लेकिन अधिकारी उनका निराकरण नहीं कर पा रहे हैं। हालांकि, संबंधित अधिकारी ई रजिस्ट्रेशन के व्यवस्थित चलने का दावा कर रहे हैं।