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अब प्रश्न पत्र के साथ बनाना होगा आदर्श उत्तर पत्र

Mon, 16 Sep 2013 05:38 AM IST
Jhansi
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झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय की परीक्षा के प्रश्न पत्र बनाने वाले शिक्षकों को आदर्श उत्तर पत्र भी तैयार करना होगा। इसमें प्रश्नों का सर्वमान्य हल होगा। उत्तर पत्र परीक्षकों को नंबर देने के लिए गाइड लाइन का कार्य करेगा। शिक्षकों को इसके लिए तीन गुना मेहनताना दिया जाएगा।
विश्वविद्यालय ने परीक्षा व मूल्यांकन प्रणाली में व्यापक परिवर्तन के लिए आदर्श उत्तर पत्र की व्यवस्था लागू की है। इस व्यवस्था के कई फायदे हैं। सही उत्तर लिखने के बावजूद नंबर कम मिलने की शिकायत या शिक्षकों द्वारा की जाने वाली गलती या बेईमानी का इससे आसानी से पता चल सकेगा। शिक्षक जानबूझ कर किसी छात्र को फेल या पास नहीं कर सकेगा। सूचना अधिकार के तहत कापी को देखने के अधिकार का प्रयोग कर छात्र परीक्षक की नीयत या योग्यता पर उंगली उठा सकेगा।
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शिक्षकों को पेपर तैयार करने के लिए नौ सौ रुपये एवं आदर्श उत्तर पत्र बनाने के लिए 27 सौ रुपये दिए जाएंगे। मॉडल आंशर शीट के आधार पर नंबर देने की व्यवस्था प्रयोग के तौर पर शिक्षा संकाय एवं इंजीनियरिंग विभाग में इसी सत्र से शुरू की जा रही है।
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कहीं प्रतिभा के साथ न हो जाए अन्याय
झांसी। आदर्श उत्तर पत्र से मूल्यांकन पद्धति में सुधार के साथ ही इसके दूरगामी नुकसान को भी अनदेखा नहीं किया जा सकता है। मॉडल आंशर शीट में प्रश्नों का उत्तर एक शिक्षक तैयार करेगा। जरूरी नहीं कि शिक्षक इतना योग्य हो कि वह प्रत्येक प्रश्न का बहुत ही बेहतर ढंग से उत्तर दे सके। जबकि, मॉडल आंशर शीट से तुलना करने पर परीक्षा में अच्छे उत्तर देने वाले छात्रों की प्रतिभा दबेगी। इसमें शिक्षकों को अपने स्व विवेक से नंबर देने की स्वतंत्रता भी छीन ली गई है। मॉडल आंशर शीट में उत्तर समान (कंटेंट व फार्म - अंतरवस्तु व तरीका) नहीं होने पर भी अगर छात्र ने बहुत कम शब्दों या वाक्यों में प्रभावी ढंग से उत्तर लिखा है तब भी उसे बहुत ही कम नंबर दिए जा सकते हैं। वरिष्ठ शिक्षकों का कहना है कि मूल्यांकन को किसी सांचे में ढालना प्रतिभाओं को दबाना है।
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