स्वच्छता सर्वेक्षण- 2019 के तहत महानगर की सफाई व्यवस्था की हकीकत जानने के लिए भारत सरकार की टीम आई है। सभी वार्डों में सर्वेक्षण किया जा रहा है। पहली बार टीम नगर निगम से संपर्क साधे बगैर अपने काम को अंजाम देने में जुटी है।
देश भर के 4,203 शहरों में स्वच्छता सर्वेक्षण हो रहा है। पिछले साल 4000 अंक थे, जबकि इस साल 5000 अंकों के आधार पर सर्वे हो रहा है। कचरा मुक्त शहर की स्टार रेटिंग के आधार पर महानगर कचरा मुक्त (गारबेज फ्री) घोषित हो गया है। सूखा और गीला कचरा अलग- अलग रखने और कचरा से कंपोस्ट खाद बनाने का काम चल रहा है। सर्वे में यह महत्वपूर्ण बिंदु था कि स्वच्छता को लेकर प्रचार- प्रसार किया गया है या नहीं। इसलिए सर्वे करने आई टीम देख रही है कि स्वच्छता के प्रचार- प्रसार के लिए होर्डिंग कहां - कहां लगाए गए हैं।
इतना ही नहीं, सर्वे टीम सभी साठों वार्डों में घूम रही है। इसमें खुले में शौच और शौचालयों की स्थिति देखी जा रही है। पार्कों में सफाई का क्या स्तर है, इसे भी देखा गया है। टीम ने जो भी देखा, उसे ऑनलाइन फीड कर सीधे स्वच्छता मंत्रालय को डाटा भेज दिया गया।
आठ सदस्यीय टीम अलग- अलग वार्डों में लोगों से बातचीत कर स्वच्छता को लेकर सवाल पूछ रही है कि क्या सफाई नियमित होती है या अभी हो रही है। क्या आप सफाई से संतुष्ट हैं, सफाई व्यवस्था को अधिक बेहतर कैसे किया जा सकता है, सूखा और गीला कचरा अलग- अलग किया जा रहा है या नहीं।