कृपया, रेलवे स्टेशन का फोटो लगाए
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प्रीमियम पार्किंग में सुविधा कुछ नहीं, किराया भरपूर
सब हेड-- रेलवे स्टेशन पर पार्किंग के नाम पर है सिर्फ लोकेशन
- विधायक ने डीआरएम को पत्र लिखकर कहा - जनमानस में जबर्दस्त आक्रोश
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। रेल प्रशासन रेलवे स्टेशन पर प्रीमियम पार्किंग के नाम पर चार पहिया वाहन चालकों को सुविधाएं तो कुछ नहीं दे रहा, लेकिन किराया भरपूर ले रहा है। हां, दिल्ली रेलवे स्टेशन से तुलना करके नियमों का डंडा जरूर चलाया जा रहा है। इससे जनप्रतिनिधि भी खफा हैं। शनिवार को विधायक रवि शर्मा ने मंडल रेल प्रबंधक को पत्र लिखकर कहा कि इस व्यवस्था से जनमानस में जबर्दस्त आक्रोश है। इस पर तुरंत आवश्यक कार्रवाई करें।
रेलवे स्टेशन पर प्रीमियम पार्किंग मेें चार पहिया वाहनों से 21 से 30 मिनट तक 60 रुपये, 31 से 59 मिनट तक 118 रुपये, एक घंटे से दो घंटे तक 236 रुपये तथा इसके बाद 354 प्रति घंटे लिए जा रहे हैं। रेल प्रशासन प्रीमियम पार्किंग के नाम पर वाहन सवारों को सिर्फ परिसर में गाड़ी खड़ी करने की लोकेशन दे रहा है। जबकि, नियमानुसार प्रीमियम पार्किंग के हिसाब से किराया लेने पर गाड़ी खड़ी करने के लिए सही जगह मिलनी चाहिए। बैठने के लिए बेंच और गाड़ी के ऊपर शेड होना चाहिए। मगर, इस तरह की कोई सुविधा नहीं दी जा रही है। गाड़ी को खुले आसमान के नीचे खड़ा करना पड़ता है।
प्रीमियम पार्किंग से खफा सदर विधायक रवि शर्मा ने शनिवार को डीआरएम को पत्र लिखकर अवगत कराया कि प्रीमियम पार्किंग के नाम से जो व्यवस्था चलायी जा रही है, उसे लेकर आम जनमानस में जबर्दस्त आक्रोश है। किराए के इस टैरिफ ने कार सवारों का बुरा हाल कर रखा है। इसलिए राहत दिलाने के लिए आवश्यक कार्रवाई करें।
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व्यवस्था खत्म होनी चाहिए
प्रीमियम पार्किंग में कार वालों को सुविधा के नाम पर कुछ नहीं दिया जा रहा है। इसके विपरीत समय की बाध्यता को लेकर ठेकेदार के कर्मचारी लोगों के साथ दुर्व्यवहार कर रहे हैं। इस व्यवस्था को खत्म होना चाहिए। डीआरएम और सीनियर डीसीएम को पत्र लिखा है।
- रवि शर्मा, विधायक।
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प्रीमियम का कोई मतलब नहीं
झांसी जैसे कम ट्रैफिक वाले शहर में रेलवे स्टेशन पर प्रीमियम पार्किंग का कोई मतलब नहीं है। इसमें कम किराया होना चाहिए। इसमें वीआईपी भी शामिल रहते हैं। कई बार उनके साथ ही दुर्व्यवहार हो चुका है। वह प्रीमियम पार्किंग समाप्त करने के लिए यहां के अधिकारियों के अलावा रेलवे बोर्ड स्तर पर भी बात करेेंगे।
- डा. चंद्रपाल सिंह यादव, राज्यसभा सांसद।
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फ्लैट किराया हो
जिस तरह से प्रीमियम पार्किंग के नाम पर वसूली की जा रही है, इसे तत्काल बंद होना चाहिए। आम आदमी का ध्यान रखकर फ्लैट (सामान्य) किराया होना चाहिए। चूंकि, रेलवे अफसर इस तरह की परेशानी से नहीं जूझते हैं, इसलिए वह आम लोगों की परेशानी नहीं समझते। इस समस्या को लेकर वह डीआरएम से मिलेंगे।
- प्रदीप जैन आदित्य, पूर्व केंद्रीय मंत्री।
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ऑटो से महंगा किराया
रेलवे स्टेशन की प्रीमियम पार्किंग का किराया तो ऑटो से ज्यादा महंगा पड़ रहा है। कार खड़ी करने में इतना किराया तो कहीं नहीं लगता। आम जनता परेशान है। रेल प्रशासन को स्वत: सस्ता किराया निर्धारित करना चाहिए, जिसका खर्चा जनता आसानी से वहन कर सकें।
- भूपेंद्र आर्य, मुख्य जोन इंचार्ज व बुंदेलखंड प्रभारी बसपा।
प्रवेश में भ्रमित होते हैं कार सवार
रेलवे स्टेशन परिसर के प्रवेश द्वार पर दो रास्ते बने हैं, इनमें एक रास्ते पर बैरिकेडिंग लगा है ,जो प्रीमियम पार्किंग के लिए जाता है। दूसरा, वीआईपी गाड़ियों के लिए है, जिसमें जाने के लिए कोई रोक - टोक नहीं है। अक्सर, चार पहिया वाहन सवार वीआईपी रास्ते से अंदर चले जाते हैं। वीआईपी रास्ते से जाने वाले वाहन सवारों के पास प्रीमियम पार्किंग की पर्ची नहीं होती है। इस कारण निकास द्वार पर किराए को लेकर अक्सर झगड़े होते हैं।