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पांच करोड़ की लागत से होने वाले 90 फीसदी विकास कार्य लटके

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पांच करोड़ की लागत से होने वाले 90 फीसदी विकास कार्य लटके
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झांसी। महानगर में होने वाले विकास कार्यों पर ब्रेक लग गया है। अवस्थापना निधि से कराए जाने वाले करीब पांच करोड़ की लागत वाले महज 10 फीसद काम ही शुरू हो सके हैं। जबकि शेष काम अधर में ही फंसे हुए हैं। इनके वर्कआर्डर तक जारी नहीं हुए हैं। वर्कआर्डर जारी न होने से काम लगातार पिछड़ता जा रहा है।
स्टांप ड्यूटी से मिलने वाली रकम नगर निगम को अवस्थापना के कार्यों को कराने के लिए मिलती है। इसके जरिए जलापूर्ति, पेयजल, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, सेप्टेज प्रबंधन, जल निकासी, स्वच्छता, सामुदायिक संपत्तियों का रखरखाव, सड़क, फुटपाथ एवं स्ट्रीट लाइट तथा श्मशान एवं कब्रिस्तान के रखरखाव संबंधी कार्य कराए जा सकते हैं। महापौर रामतीर्थ सिंघल की अध्यक्षता वाली अवस्थापना कमेटी करीब पांच करोड़ रुपये के काम दो माह पहले स्वीकृत कर चुकी लेकिन, तकनीकी अड़चनों के चलते यह काम शुरू नहीं हो पा रहे हैं। प्रस्ताव मंजूर होने के बाद टेंडर कराए गए। इनमें से अस्सी फीसदी टेंडर कम दरों पर आए। कई टेंडर इतनी कम दर पर भरे गए कि उसमें कार्य की गुणवत्ता बनाए रखना संभव नहीं था। इसी बीच मुख्य अभियंता एस अंबेडकर भी कोरोना की चपेट में आ गए। इस वजह से यह मामला तब से अटका हुआ है। अवस्थापना निधि से चुनिंदा काम ही इस समय कराए जा रहे जबकि अधिकांश स्वीकृत कार्य फाइलों में डंप पड़े हैं। कार्य शुरू न होने से पार्षदों में भी आक्रोश है। महापौर रामतीर्थ सिंघल का कहना है कि अधिकारियों के साथ विचार-विमर्श करके जल्द ही इन कार्यों को शुरू कराने की कोशिश होगी।
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15वें वित्त आयोग के कार्य होंगे शुरू
पंद्रहवें वित्त आयोग के 12 करोड़ रुपये से स्वीकृत कार्य जल्द शुरू होने की उम्मीद है। इसके जरिए प्रत्येक पार्षद को बीस लाख रुपये से अपने वार्ड में काम कराने का मौका दिया गया है। स्वीकृत कार्यों के लिए जल्द ही निविदा प्रकिया अंतिम दौर में पहुंच गई है। इन कार्यों के जून के दूसरे सप्ताह से आरंभ होने की उम्मीद जताई जा रही है।
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