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रक्तदान के समय 83 लोगों को पता चला... एचआईवी, हेपेटाइटिस के हैं शिकार

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झांसी। जब रक्तदान करने पहुंचे, तब झांसी के 83 लोगों को पता चला कि वो एचआईवी, हेपेटाइटिस और सिफलिस जैसी बीमारियों का शिकार हैं। इसके बाद इन लोगों को रक्त नष्ट कर दिया गया। इनमें अधिकांश युवा हैं, इनकी उम्र 18 से 40 साल के बीच में है।
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सरकारी अस्पतालों में भर्ती कई मरीजों को रोजाना रक्त की जरूरत पड़ती रहती है। एचआईवी, थैलेसीमिया, विकलांग, कैदी, असाध्य रोगियों, आकस्मिक मरीजों आदि को बिना डोनर के रक्त दिया जाता है। जबकि, दूसरे मरीजों का कोई परिचित व्यक्ति रक्तदान करता है तो संबंधित यूनिट का रक्त बदलकर दे दिया जाता है। इससे पहले रक्त की जांच भी होती है। मेडिकल कॉलेज के वित्तीय वर्ष 2021-22 के आंकड़ों पर गौर करें तो पिछले साल 8000 यूनिट रक्त ब्लड बैंक में एकत्रित हुआ। इसमें हेपेटाइटिस बी के सर्वाधिक 64 मरीज मिले हैं। जबकि, हेपेटाइटिस सी के तीन और एचआईवी और सिफलिस के दो-दो मरीज मिले हैं। वहीं, वित्तीय वर्ष 2021-22 में जिला अस्पताल में 1338 यूनिट रक्तदान एकत्रित हुआ। इसमें हेपेटाइटिस बी के 10 और हेपेटाइटिस सी व सिफलिस के एक-एक रोगी मिला है। इसके बाद उनके द्वारा दिए गए इस रक्त को नष्ट कराया गया।
वायरस से होता है हेपेटाइटिस
झांसी। मेडिकल कॉलेज के ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. एमएल आर्या ने बताया कि हेपेटाइटिस बी और सी बीमारी वायरस से होता है। ये बीमारी संक्रमित व्यक्ति का खून चढ़ने से, संक्रमित व्यक्ति से शारीरिक संबंध बनाने या फिर गर्भवती महिला से उसके बच्चे को होता है। ये वायरस हमेशा शरीर में रहता है। जब वायरस सक्रिय हो जाता है, तो लिवर डैमेज कर देता है। वहीं, सिफलिस बीमारी रक्त के जरिए दूसरे व्यक्ति में फैलती है। हालांकि, ये दवाओं से ठीक हो जाती है।
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