शासन की प्राथमिकता में शामिल प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के लिए सिमराहा में चिह्नित जमीन को कुछ लोगों ने अपना बताते हुए पिलर उखाड़ दिए और नींव खोदकर रातोंरात दीवार खड़ी कर दी। सूचना पर दौड़ी नगर निगम की टीम ने निर्माण कार्य रुकवा दिया है। इसी तरह के अन्य मामले में शामिल खाते में होने और 23 साल पहले बंटवारा होने के बाद भी नगर निगम ने उक्त जमीन पर बुलडोजर चलवा दिया। रैन बसेरा बनाने की तैयारी है। पीड़ित परेशान होकर चक्कर लगा रहा है।
सिमराहा में प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत गरीबों के लिए आवास बनाए जाने हैं। यहां पांच से छह एकड़ जमीन है। पिछले दिनों इस जमीन पर ठेकेदार ने सीमांकन कर खंभे लगा दिए थे। कुछ जमीन कारोबारियों ने दबाव बनाकर खंभे उखड़वा दिए। करीब तीस हजार वर्ग फिट जमीन अपने कब्जे में ले ली। नींव खोदकर रातोंरात काम शुरू कर दिया। सुबह होते- होते दीवार तैयार हो गई। अस्थायी रूप से कमरा भी बना दिया गया। ठेकेदार के नगर निगम में आकर पूरे मामले से अवगत कराया, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। जानकार सूत्रों की मानें तो यह कुछ पार्षदों के दबाव में किया गया।
सोमवार को फिर पीड़ित ने शिकायत की तो संपत्ति अधिकारी डॉ. पुष्पराज गौतम मौके पर पहुंचे और उन्होंने संबंधित व्यक्ति से काम रोकने को कहा। उन्होंने खसरा- खतौनी दिखाने को कहा है और कहा कि जब तक अनुमति न मिल जाए निर्माण नहीं करना।
इसी तरह आईटीआई के पास मौजा नयागांव में आराजी नंबर 327 और 329 में नगर निगम और काश्तकार की जमीन है। मिली- जुली जमीन होने के कारण 1996 में इसका बंटवारा हो गया था कि कौन सी जमीन नगर निगम की है और कौन सी कास्तकार की। लेकिन, नगर निगम इस बंटवारे को नहीं मान रहा है।
पिछले दिनों उसने उक्त जमीन पर बुलडोजर चला दिया और अब वहां पर आश्रय स्थल बनाने की तैयारी है। दूसरी ओर, पीड़िता कुसुम बराबर मांग कर रही है कि उसकी जमीन अलग कर दी जाए, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। संपत्ति अधिकारी ने बताया कि तहसील से हदबंदी कराने के बाद ही कुछ हो सकता है।