पांच साल में बुंदेलखंड में मिले टीबी के 800 मरीज
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बुंदेलखंड में पिछले पांच सालों में टीबी के मरीजों की संख्या 800 पहुंच गई है। हालांकि, राष्ट्रीय कार्यक्रम के अंतर्गत टीबी के मरीजों की मृत्युदर में जरूर कमी आई है। आधुनिक जांच प्रणाली ‘जीन एक्सपर्ट’ से मरीजों की जल्द पहचान कर महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में नि:शुल्क इलाज चल रहा है।
टीबी माइक्रोबैक्टीरियम नामक जीवाणु से श्वास मार्ग द्वारा एक दूसरे को फैलता है। पूरा इलाज कराने पर यह बीमारी पूरी तरह से ठीक हो जाती है। लापरवाही पर रोग बदतर होकर भयावह रूप ले लेता है और एमडीआर (मल्टी ड्रग्स रजिस्टेंस) टीबी हो जाती है। इसका इलाज बहुत जटिल, असहनीय और लंबी अवधि यानी लगभग 24-27 महीने का होता है। मेडिकल कॉलेज के चेस्ट रोग विभागाध्यक्ष डॉ. मधुर्मय शास्त्री का कहना है कि ‘जीन एक्सपर्ट’ से एमडीआर टीबी के मरीजों की पकड़ बहुत जल्दी हो जाती है। इस टेस्ट से अब तक बुंदेलखंड में लगभग 800 मरीजों मिले हैं। इनका इलाज मेडिकल कॉलेज के टीबी एवं चेस्ट रोग विभाग यानी डॉट्स प्लस यूनिट में नि:शुल्क चल रहा है।
क्या कहते हैं आंकड़े
- विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के आंकड़े के अनुसार भारत में हर साल लगभग चार लाख लोग टीबी से मर जाते हैं।
- हर रोज लगभग पांच हजार लोगों को टीबी होती है। प्रतिदिन एक हजार मर जाते हैं। हर तीन मिनट में एक मौत होती है।
नई दवा से छह माह में इलाज
टीबी के इलाज के लिए बीडाकुलीन नामक नई दवा ईजाद की गई है। इसके जरिए अब 24 महीने नहीं, सिर्फ छह माह में ही एमडीआर टीबी का इलाज हो जाता है। एक गोली पांच हजार रुपये की है लेकिन सरकार राष्ट्रीय क्षय रोग नियंत्रण के अंतर्गत मरीजों को जल्द ही नि:शुल्क उपलब्ध कराने जा रही है। यह दवा एमडीआर टीबी के उन मरीजों को दी जाएगी, जिन पर अन्य दवा बेअसर साबित हो रही हैं।