झांसी। कृषि कानून संशोधन, न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की गारंटी को लेकर देश भर के किसान आंदोलित हैं। जिस एमएसपी सुरक्षा के दावे सरकार कर रही है उसकी जमीनी हकीकत यह है कि बुंदेलखंड में करीब अस्सी फीसदी किसान अकसर इसके फायदे से वंचित रह जाते हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक पिछली रबी सीजन में झांसी मंडल से महज बीस फीसदी किसानों को एमएसपी का फायदा हुआ। खरीफ सीजन की मूंगफली दो माह पहले बाजार में आ गई। लेकिन, सरकारी खरीद केंद्र अब तक नहीं खुले। ऐसे में इसकी एमएसपी का भी फायदा भी किसानों को नहीं मिल सकेगा।
किसान को बाजार के नुकसान से बचाने के लिए कृषि लागत एवं मूल्य आयोग उपज का न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करता है। अभी उपज की लागत के पचास फीसदी अधिक पर यह एमएसपी तय हुई है। सरकार इसके जरिए किसानों की मदद के दावे जरूर कर रही है। लेकिन खरीद प्रक्रिया के जटिल होने से बुंदेलखंड के बड़ी संख्या में किसान इससे वंचित रह जाते हैं। सरकारी केंद्र में उपज बेचने से पहले रजिस्ट्रेशन समेत कई जरूरी औपचारिकताएं पूरी करनी होती हैं। पैसा भी तीन दिन बाद मिलता है। दुश्वारियाें से बचने को किसान खुले बाजार में उपज बेच देते हैं। सरकारी आंकड़े बताते हैं झांसी में 13228, जालौन में 14017 एवं ललितपुर में 13089 किसान ही खरीद केंद्र तक पहुंचे। इस तरह बीस फीसदी किसानों को ही एमएसपी का फायदा हुआ।
खरीफ सीजन में तय हुई एमएसपी का फायदा भी किसानों तक नहीं पहुंचता। बुंदेलखंड में मूंगफली, उड़द की फसल अच्छी होती है। एमएसपी भी ऊंची होती है। लेकिन बिचौलियों के हावी होने से इसका फायदा किसानों को नहीं मिलता। मूंगफली सितंबर माह तक बाजार में आ गई लेकिन, बिचौलियों के प्रभाव के चलते तयशुदा समय पर सरकारी क्रय केंद्र नहीं खुलतेे। इस वर्ष झांसी में 75 हजार से अधिक किसानों ने मूंगफली लगाई। कुल 24885 हेक्टेयर में करीब 24809 मैट्रिक टन मूंगफली की बंपर फसल हुई। लेकिन, सरकारी क्रय केंद्र न खुलने से मजबूरी में किसानों को खुले बाजार में 3500 रुपये प्रति क्विंटल पर उपज बेचनी पड़ी जबकि सरकार ने 5300 रुपये की एमएसपी तय की हुई है।
खरीद के लिए जो प्रक्रिया तय होती है, उसके मुताबिक ही खरीद की जाती है। सरकार की ओर से ही लक्ष्य तय किया जाता है। नरेंद्र कुमार, आरएफसी
मूंगफली क्रय केंद्र शासन स्तर से तय होते हैं। कुछ दिनों पहले क्रय केंद्र खोले जाने के निर्देश मिले हैं। जल्द ही यह क्रय केंद्र आरंभ कर दिए जाएंगे। केपी शुक्ला, एआर, सहकारिता