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अगले माह शुरू हो जाएगी फॉरेंसिक लैब

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अगले माह शुरू हो जाएगी फॉरेंसिक लैब
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झांसी। राजगढ़ में बनने वाली फॉरेंसिक लैब के मार्च माह में शुरू होने की पूरी संभावना है। इस संबंध में पुलिस महानिदेशक ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं। हालांकि, लैब अभी पूरी तरह से तैयार नहीं हुई है. लेकिन उसके कुछ विभागों में जांच शुरू हो जाएगी। लैब शुरू होने के बाद बुंदेलखंड के कई जिलाें की पुलिस को फायदा मिलेगा।
सरकार ने जनवरी 2016 में जिले के राजगढ़ स्थित पीएसी में फॉरेंसिक लैब खोलने का निर्णय लिया था। 35 करोड़ की लागत से बनने वाली लैब का काम 2018 तक पूरा होना था, लेकिन बजट जारी न होने के कारण काम समय पर शुरू नहीं हो सका। एक साल तक काम ठप भी रहा। जैसे तैसे बजट जारी होता रहा। ्ब तक कुल 21 करोड़ रुपये ही जारी हो सके। इस कारण यूपी राजकीय निर्माण निगम लैब की चार मंजिला इमारत को पूरा नहीं कर सका।
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फोरेंसिक लैब तैयार नहीं होने से बुंदेलखंड पुलिस को परेशानी हो रही है। घटनास्थल अथवा लाश के पास से एकत्रित सबूतों की जांच महीनों बाद भी नहीं हो पा रही हैं। तमाम मुकदमों की विवेचनाएं लंबित पड़ी हुई हैं। इसे देखते हुए पुलिस महानिदेशक ओ पी सिंह ने फोरेंसिक लैब जल्द से जल्द शुरू करने के निर्देश दिए। उन्होंने लैब के कुछ सेक्शन शुरू करने के निर्देश दिए हैं। संभावना है कि मार्च माह में कुछ विभागों में यहां जांच शुरू हो जाएगी। उधर, अपर परियोजना प्रबंधक आरपी सिंह ने बताया कि जैसे जैसे बजट मिल रहा है, वैसे काम हो रहा है। उम्मीद है मार्च तक पूरी रकम मिलने के बाद काम पूरा हो जाएगा।
ऐसे होती है फॉरेंसिक जांच
पोस्टमॉर्टम होने के बाद बिसरा संभाल कर रख लिया जाता है, जबकि नमूनों को जांच के लिए भेज दिया जाता है। विसरा का विश्लेषण अलग से होता है। जैसे जहर दिए जाने की वारदात हुई है तो इसमें सामान रखने के कंटेनर्स को भी लिया जाता है। गैस्ट्रिक लावास नाम का एक नमूना लिया जाता है और इन सभी का रासायनिक विश्लेषण किया जाता है। मान लीजिए कि भोजन में कीटनाशक मिले होने का शक हो तो फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी वाले रासायनिक विश्लेषण करते हैं तो विशेषज्ञ जहर की जांच करते हैं। जांच में सारी सच्चाई सामने आने के बाद ही रिपोर्ट तैयार होती है।

रिपोर्ट न आने का रहता बहाना
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह साफ नहीं होने पर बिसरा सुरक्षित रखा जाता है। जिसे जांच के लिए फोरेंसिक लैब भेजा जाता था। लखनऊ और आगरा से रिपोर्ट में आने में कई माह बीत जाते हैं, जबकि तमाम केस तो ऐसे भी रहेे। जिसकी रिपोर्ट ही नहीं आई। रिपोर्ट न आने का बहाना बनाकर पुलिस हाथ पर हाथ रखकर बैठी रहती है। लैब बनने के बाद पंद्रह दिन के भीतर पुलिस के हाथ में रिपोर्ट होगी।
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होगा फायदा
- पुलिस महकमे को जांच के लिए आगरा व लखनऊ तक दौड़ से बचत
- आसपास के दो दर्जन से ज्यादा जिलों को भी मिलेगा फायदा
- समय के साथ पैसे की भी बचत होगी, जल्द रिपोर्ट से काम आसान
- गुणवत्ता पूर्ण जांच के लिए आधुनिक मशीनों पर काम का लाभ
इनको मिलेगा फायदा
वर्तमान में जांचों का विसरा आगरा भेजा जाता है। ऐसे में निर्माण होने के बाद इसका फायदा झांसी के साथ ललितपुर, जालौन, महोबा और हमीरपुर पुलिस को मिलेगा।
यह होंगे जांचें
- रक्त की जांच
- बिसरा की जांच
- बैलेस्टिक जांच
- डाक्यूमेंट जांच
- फिजिक्स, बॉयोलॉजी जांच
- सीरोलॉजी से संबंधिज जांच
वैज्ञानिक के बिना चल रही फील्ड यूनिट
पुलिस विभाग की फॉरेंसिक फील्ड यूनिट भी बिना वैज्ञानिक के चल रही है। घटना के समय मौके पर पहुंचकर साक्ष्य एकत्रित करने वाली फॉरेंसिक फील्ड यूनिट भी दो पुलिसकर्मियों के सहारे चल रही है। वैज्ञानिक के अभाव में जहां यह फील्ड यूनिट वैकल्पिक व्यवस्था के सहारे अपने अनुभव से काम कर रही है। वहीं, कई कार्य ऐसे भी हैं जो वैज्ञानिक के बिना नहीं हो सकते। पता चला है कि करीब डेढ़ वर्ष पहले एक वैज्ञानिक को लखनऊ से झांसी के लिए स्थानांतरित किया गया था, लेकिन अब तक वैज्ञानिक की तैनात नहीं हो सकी। झांसी में तैनात वैज्ञानिक को आगरा से अटैच कर दिया गया है। जिसके बाद से पुलिस विभाग का फॉरेंसिक विभाग बिना वैज्ञानिक के चल रहा है।
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