........................................
शैतान को कंकरियां मारना सिखाया
- कार्यक्रम में हाजियों को बताए हज के तौर तरीके
- टीके लगाकर स्वास्थ्य संबंधी जानकारियां भी दीं
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। हाफिज सिद्दीकी नेशनल इंटर कॉलेज में हज यात्रा पर जाने वाले हाजियाें को हज अदा करने के दौरान अरकान पूरा करने के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। प्रोजेक्टर के जरिए हवाई जहाज में बैठने से लेकर तवाफ (परिक्रमा करना) करने और शैतान को कंकरियां मारने के भी तौर तरीके सिखाए। इसके बाद सभी हाजियों को टीके लगाकर स्वास्थ्य की जानकारियां दी गईं।
बृहस्पतिवार को आयोजित कार्यक्रम की शुरुआत मौलाना मोहम्मद आमिल कासमी और कॉलेज के मैनेजर मुहम्मद असलम ने की। इसके बाद सभी हाजियों को हज के तौर तरीके बताए गए। इस मौके पर मुफ्ती मोहम्मद साबिर कासमी ने एहराम के कपड़े को बांधने का तरीका सिखाया। इसके अलावा चित्रों के जरिए तवाफ करना, सई (सफा) व मरवा के बीच दौड़ना, शैतानों को कंकरियां मारने आदि के बारे में भी बताया।
इस दौरान जिला हज कमेटी के सदस्य मुसर्रत अली ने हज में हज कमेटी ऑफ इंडिया मुंबई की सऊदी अरब में भूमिका पर प्रकाश डाला। हाजी डा. इकबाल अख्तर सिद्दीकी ने चिकित्सा संबंधी समस्याओं पर प्रकाश डाला। इसी बीच झांसी से जाने वाले 160 हज यात्रियों को पोलियो, मेनिंजोकोकल, मेनेन्जाइटिस और इनफ्लूएंजा के टीके लगाकर स्वास्थ्य की जांच की गई।
इस मौके पर जिला हज कमेटी के सचिव व अल्पसंख्यक अधिकारी अमित प्रताप सिंह, मुहम्मद आरिफ नदवी, तनवीर अहमद खान, अब्दुल जलील खान, अब्दुल अलीम, ताज मुहम्मद खान, अजीम उल्लाह, नौशाद खान, मुहम्मद उवैस, एसएम अजीम, नदीम हसन, हाजी महमूद अब्दुल अजीज मौजूद रहे।
हिदायत
- किसी बीमारी से परेशान हों तो डाक्टर की सलाह से जरूरी दवाएं साथ ले जाएं।
- सफर के तमाम कागजात की फोटो स्टेट साथ ले जाएं। उसकी एक कापी घर पर भी छोड़ कर जाएं।
- रवानगी से पहले दो जोड़ी एहराम और दो जोड़ी चप्पल साथ रखें।
- हर वक्त बा-वजू रहने की कोशिश करें।
- रकम एक जगह न रखें। कई हिस्सों में बांट कर रखें।
- चश्मा लगाते हों तो दो-तीन चश्मे साथ लेकर जाएं।
अब रवानगी की बारी
हज यात्रा के लिए जरूरी टीकाकरण के साथ ही कई दिनों से जारी कशमकश दूर हुई और हाजियों के लिए हज पर रवानगी का रास्ता भी साफ हुआ। दरअसल हज यात्रा के लिए टीकाकरण और हेल्थ कार्ड जरूरी है। टीके लगवाने के साथ ही हज पर जाने वालों ने अपने करीबियों, रिश्तेदारों से मिलने-जुलने का सिलसिला शुरू किया। इस दौरान सफर में सलामती के लिए जहां अपनों ने उन्हें दुआएं दीं, वहीं किसी ने खजूर, जानमाज, टोपी तो किसी ने तस्वीह, आबेजमजम लाने की गुजारिश भी की।