क्षेत्र में 70 फीसदी गर्भवती महिलाएं खून की कमी (एनीमिया) से जूझ रही हैं। इनमें से कई महिलाओं का समय से पूर्व प्रसव हो जाने के चलते नवजात दम तोड़ देते हैं या गर्भपात करना पड़ जाता है। डॉक्टरों के अनुसार नवजातों की मौत का यह भी एक बड़ा कारण है। जो जीवित बचते हैं उनका बचपन भी असुरक्षित रहता है।
महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में दो से तीन हीमोग्लोबिन वाली प्रसूताएं भर्ती हो रही हैं। यहां दिसंबर में 300 प्रसव हुए। लगभग 70 फीसदी में खून की कमी थी। पिछले महीने 50 गर्भवती चार से कम हीमोग्लोबिन वाली आईं। कॉलेज में इन मरीजों को 40 यूनिट खून चढ़ाकर सफल इलाज किया गया। उन्हें आयरन थेरेपी दी गई। वरना कई और जच्चा-बच्चा की जानें जा सकती थीं। खून की कमी की हालत में तीन को वेंटिलेटर पर रखना पड़ा।
ये हैं आंकड़े
- अप्रैल से नवंबर 2019 तक 34,603 में 23864 गर्भवती महिलाओं में खून की कमी पाई गई। 1189 में गंभीर खून की कमी मिली।
- अप्रैल 2019 में दिसंबर 2019 तक जनपद में 28 मातृ मृत्यु हो चुकी है। इसमें 11 प्रसव के बाद अधिक रक्तस्राव से हुई है।
- डब्ल्यूएसओ की वर्ष 2014 की रिपोर्ट के अनुसार प्रसव के बाद रक्तत्राव से 29.6 और एनीमिया से 19 प्रतिशत मातृ मृत्यु का संबंध गर्भावस्था में खून की कमी है।
केस-एक
मेडिकल कॉलेज में लक्ष्मी महज दो यूनिट हीमोग्लोबिन के साथ आई थी। मरीज को तुरंत वेंटिलेटर पर रखा गया। जीवन रक्षक दवाएं दी गईं। उसे तीन यूनिट खून भी चढ़ाया गया।
केस-दो
अभिलाषा नामक एक और मरीज ऐसी ही हालत में मेडिकल कॉलेज में भर्ती हुई। उसका हीमोग्लोबिन तीन यूनिट था। उसे भी वेंटिलेटर पर रखकर चार यूनिट खून चढ़ाया गया।
गर्भावस्था में एनीमिया के दुष्परिणाम
- बच्चे का सही विकास न होना।
- समय से पूर्व प्रसव, शिशु की जान का खतरा।
- गर्भपात।
- प्रसव के बाद अधिक रक्तश्राव, जिससे मां को खतरा।
क्या सावधानी बरतें
- योग्य चिकित्सक के संपर्क में रहें।
- आयरन व अन्य गोली नियम से लें।
- गर्भावस्था के दौरान लोहे की कढ़ाई आदि में साग, सब्जी बनाएं।
- प्रचुर मात्रा वाली सब्जी पालक आदि का सेवन अधिक करें।
समय पूर्व प्रसव से चली गई जान
बामौर ब्लॉक के खड़ेगी गांव की 30 वर्षीय महिला को 31 दिसंबर को समय से पहले प्रसव हो गया था। इस कारण उनके बच्चे की मौत हो गई। महिला के तीन और बच्चों की प्रसव के समय मौत हो चुकी है।
हर नौ तारीख को करा सकते जांच
प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के अंतर्गत माह की हर नौ तारीख को सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर गर्भवती महिलाओं की संपूर्ण जांच की जाती है। इस दिन कोई भी गर्भवती महिलाएं स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर जांच करा सकती हैं।
गर्भवती महिलाओं में खून की कमी बड़ी समस्या है। मेडिकल कॉलेज में जिनका नियमित इलाज चलता है, उनमें एनीमिया की कमी दूर कर ली जाती है। मगर कॉलेज में ज्यादातर रेफर होकर गर्भवती आती हैं। कइयों का हीमोग्लोबिन चार से भी कम होता है। इनकी विशेष निगरानी कर खून चढ़ाकर सफल ऑपरेशन किए जाते हैं। - डॉ. संजया शर्मा, स्त्री एवं प्रसूति रोग विभागाध्यक्ष, मेडिकल कॉलेज।