बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के कैंपस कोर्सों और संबद्ध कॉलेजों में अध्ययनरत करीब सत्तर फीसदी छात्रों की छात्रवृत्ति/ शुल्क प्रतिपूर्ति पर इस बार संकट के बादल मंडराने लगे हैं। पूर्व प्रवेशित छात्र-छात्राओं के पास छात्रवृत्ति हेतु आवेदन करने के लिए शुक्रवार तक का मौका है लेकिन कई कोर्सों के रिजल्ट नहीं निकलने से अब उनके हाथ बंध गए हैं।
गौरतलब है कि शासन ने विभिन्न कोर्सों में पूर्व प्रवेशित छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति/ शुल्क प्रतिपूर्ति के नवीनीकरण के लिए 31 जुलाई तक का समय दिया था। इस बार छात्रवृत्ति / शुल्क प्रतिपूर्ति वितरण को लेकर भी शासन ने नई नीति निर्धारित कर दी है। नई नीति के मुताबिक मेरिट के आधार पर विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति / शुल्क प्रतिपूर्ति का वितरण किया जाना है। इस कारण छात्रों को छात्रवृत्ति/ शुल्क प्रतिपूर्ति आवेदन फार्म भरते समय अंतिम सेमेस्टर अथवा वर्ष के अंकों का उल्लेख करना आवश्यक हो गया है।
चूंकि, बुंदेलखंड विश्वविद्यालय परिसर व संबद्ध महाविद्यालयों के कई कोर्सों के रिजल्ट अभी आउट नहीं हुए हैं, इसलिए पुन: प्रवेश प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी है। ऐसी स्थिति में यदि छात्र पूर्व सेमेस्टर को दर्शाकर आवेदन करते हैं तो उन्हें संदेहास्पद की सूची में डाल दिया जाएगा। रिजल्ट में लेटलतीफी पर कुलपति भी कई बार विभाग प्रमुखों व कॉलेज को फटाकर लगा चुके हैं। अब छात्रों के समक्ष आगे खाई और पीछे कुआं वाली स्थिति उत्पन्न हो गई है।
...तो छात्रों को होगी परेशानी
झांसी। अनुसूचित जाति, जनजाति के ऐसे छात्र जो छात्रवृत्ति / शुल्क प्रतिपूर्ति शुल्क के नाम पर शून्य फीस पर प्रवेश ले लेते हैं, उनसे विश्वविद्यालय अथवा कॉलेज कोई पाठ्यक्रम शुल्क नहीं लेता है, यदि वह आवेदन नहीं कर पाएंगे तो संबंधित शिक्षा संस्थान फीस की भरपाई उनसे शुल्क लेकर करेगा। जानकारों ने बताया कि संबंधित विद्यार्थियों को तभी मार्कशीट/ डिग्री जारी की जाएगी, जब उनसे पाठ्यक्रम शुल्क ले लिया जाएगा। इससे निर्धन छात्रों को पढ़ाई में परेशानी होगी।
तिथि बढ़ने से लग सकता मरहम
झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय की बात अगर छोड़ भी दें तो प्रदेश के अन्य यूनिवर्सिटी का हाल और भी बदहाल है। कई विश्वविद्यालयों में अभी तक रिजल्ट नहीं निकल सके हैं। अब बुंदेलखंड समेत प्रदेश के हजारों गरीब छात्रों की पढ़ाई के संकट का हल सिर्फ तिथि बढ़ने से ही निकल सकता है।