झांसी। जिले की 67 ग्राम सभाओं के जनप्रतिनिधि बीस दिसंबर को शपथ नहीं ले पाएंगे। दो सीटों पर चुनाव न होने व 65 सीटों पर दो तिहाई से कम सदस्य चुने जाने के कारण यहां के चुने गए प्रधान शपथ नहीं ले पाएंगे। कम सदस्य वाली पंचायतों में खाली पड़े पदों के लिए फिर से चुनाव होंगे।
नवनिर्वाचित ग्राम प्रधानों और ग्राम पंचायत सदस्यों का शपथ ग्रहण समारोह बीस दिसंबर को ब्लाक मुख्यालयों पर पूर्वाह्न 11 बजे होगा। प्रधानों को शपथ दिलाने के लिए खंड विकास अधिकारियों को नामित किया गया है। शपथ ग्रहण के बाद 26 दिसंबर को गांवों में औपचारिक बैठक होगी, जिसके बाद प्रधानों का कार्यकाल शुरू माना जाएगा।
शपथ ग्रहण की सूचना जारी करते हुए डीएम अनुराग यादव ने स्पष्ट किया है कि जिन ग्राम सभाओं में दो तिहाई सदस्यों से कम सदस्य निर्वाचित हुए हैं, वहां के प्रधान व अन्य सदस्यों को शपथ नहीं दिलाई जाएगी।
जिले की 494 ग्राम पंचायतों में से 492 सीटों पर चुनाव हुआ था। बबीना ब्लाक की मथुरापुरा व पलींदा सीट अनुसूचित जन जाति के लिए आरक्षित होने और क्षेत्र में इस जाति का सदस्य न होने के कारण यहां चुनाव नहीं हो सका था। वहीं, जिले की 65 ग्राम पंचायतें ऐसी हैं, जहां दो तिहाई से कम सदस्य निर्वाचित हुए हैं।
बबीना ब्लाक में 12, चिरगांव ब्लाक में आठ, मोंठ ब्लाक में बीस, गुरसरांय में एक, बामौर में 11, मऊरानीपुर में 13 ग्राम पंचायतें ऐसी हैं, जहां कुल संख्या से दो तिहाई कम सदस्य चुने गए हैं। ऐसे में यहां के प्रधानों और अन्य सदस्यों को शपथ नहीं दिलाई जाएगी। सदस्यों के चुनाव होने तक यहां एडीओ पंचायत प्रशासक के तौर पर कार्य करेंगे। वहीं मथुरा पुरा एवं पलींदा सीट पर पूरे पांच साल प्रशासक कार्य संभालेंगे।
कैरोखर में नहीं चुना गया एक भी सदस्य
बामौर ब्लाक की ग्राम पंचायत कैरोखर में एक भी सदस्य नहीं चुना गया है। यहां प्रधान पद के लिए चार प्रत्याशी मैदान में थे, लेकिन ग्राम पंचायत सदस्य के लिए किसी ने भी आवेदन नहीं किया। ऐसे में बिना सदस्यों के बने प्रधान जी को अभी शपथ नहीं दिलाई जा सकेगी।
बंगरा व बड़ागांव के सभी प्रधान लेंगे शपथ
बंगरा व बड़ागांव ब्लाक में एक भी ग्राम पंचायत ऐसी नहीं है, जहां दो तिहाई से कम सदस्य चुन कर आए हों। ऐसे में दोनों ब्लाकों में चुने गए सभी ग्राम प्रधान व सदस्य बीस दिसंबर को शपथ लेकर 26 दिसंबर को पदभार संभाल लेंगे।
अनुभव की कमी बनी कारण
नवनिर्वाचित प्रधानों में अनुभव की कमी के कारण सदस्यों का चुनाव नहीं हो सका। अब तक प्रधान का चुनाव लड़ने वाला प्रत्याशी अपने विश्वसनीय लोगों का सदस्य पद के लिए नामांकन करा देता था। इनमें से अधिकांश जीत कर आते थे और पूरे कार्यकाल में प्रधान का सहयोग करते थे। इस बार सर्वाधिक प्रधान नई उम्र के जीत कर आए हैं। वह खुद तो चुनाव लड़कर जीत गए, लेकिन अनुभव की कमी के कारण सदस्यों को नहीं लड़ाया, नतीजा वह जीत कर भी खुद को हारे जैसा महसूस कर रहे हैं।