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मुसीबत के नाले में नगर निगम की इंजीनियरिंग फेल

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अब समझ में आया, ये नाला है ‘गड़बड़झाला’
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झांसी। सरकारी मिलीभगत की एक घिनौनी हकीकत सामने आई। क्षेत्रवासियों के लिए नासूर बने आवास विकास के केके पुरी नाले का महापौर रामतीर्थ सिंघल ने निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने प्रथम दृष्टया पाया कि नाला निर्माण में नगर निगम ने ढाल (स्लोप) के मानकों की अनदेखी की है। यही नहीं, स्थानीय लोगों की तमाम शिकायतों के बावजूद विभागीय अमला लगातार इन खामियों पर पर्दा डालता रहा। खुलासा होने के बाद महापौर ने विभागीय इंजीनियरों से जवाब मांगा है। अमर उजाला इस नाले से होने वाली परेशानियों को उठाता रहा है।
रेलवे कालोनी, नगरा, इसाईटोला, खातीबाबा सहित कई इलाकों के पानी की निकासी के लिए नगर निगम ने बड़ा नाला तैयार कराया था जो लोगों के लिए मुसीबत बना हुआ है। लगातार मिलने वाली शिकायतों के बावजूद समाधान नहीं हो रहा था। आखिरकार, महापौर ने मौका मुआयना किया और नाले के स्लोप की जांच कराई, जिसमें प्रथम दृष्टया नगर निगम इंजीनियरों की लापरवाही सामने आई। इतना ही नहीं, नाले के निर्माण में प्रयोग की गई सामग्री भी घटिया पाई गई। इस पर महापौर ने तत्काल मामले में जांच कर कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए। खुद उन्हें एहसास हुआ कि नाला स्थानीय लोगों के लिए गड़बड़झाला है।
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बता दें कि पिछले साल बरसात में लोगों के घरों में कई फुट पानी भर गया था। इस साल दोबारा समस्या न खड़ी हो इसके लिए लगातार शिकायतों का दौर जारी था। नगर निगम अफसर अपनी इस खामी पर हर बार पर्दा डालने में सफल हो जाते थे। लेकिन, इस बार पोल खुल गई।

बेजोड़ तालमेल से नाला कागजों में हुआ पास
नाला निर्माण में इंजीनियर और ठेकेदार के बीच का तालमेल अब तक बेजोड़ साबित हो रहा था। यहां तक की पिछले साल हुए जलभराव में चीफ इंजीनियर मौके पर पहुंचे थे और उस वक्त स्थानीय निवासियों ने स्लोप गलत बनाने का विरोध किया था। लेकिन चीफ इंजीनियर ने एक नहीं सुनी थी और खानापूर्ति के लिए नाले में अंदर पड़े कचरे को निकलवा कर साफ करा दिया था। यह भी कहा था कि कचरे के कारण पानी रुक रहा था। जबकि, स्थानीय निवासी अरविंद वर्मा जो एक सरकारी विभाग में बतौर इंजीनियर के पद पर तैनात हैं। उन्होंने भी नाले के स्लोप पर सवाल खड़े किए थे पर उनकी भी एक नहीं मानी थी।

650 फुट लंबे नाले में 12 इंच का ढाल
नाले का वाटर लेवल जब चेक कराया गया तो महापौर ने पाया कि 650 फुट लंबे नाले में मात्र 12 इंच का ढाल था। जबकि, 100 फुट पर लगभग छह इंच का ढाल होना चाहिए था। बावजूद, कागजों में नाला पास हो गया।

अवैध कब्जा दूसरी बड़ी मुसीबत
शहर के बड़े नाले में से एक केके पुरी का नाला जेसीबी मशीन के माध्यम से साफ किया जाता है। लेकिन, अब इस नाले को साफ करने के लिए संभावनाएं नहीं बची हैं। आसपास के लोगों ने नाले के बगल से अपने मकान खड़े कर लिए हैं। ऐसे में नगर निगम के सफाई कर्मचारियों को सफाई के वक्त खासी मुश्किलों का सामना करना होगा।

कचरा फेंका तो होगा जुर्माना
मौके पर नाला कचरे से पटा पाया गया। आसपास के क्षेत्रवासियों ने बताया कि कुछ लोग कचरा पॉलीथीन में बांधकर उसमें फेंक देते हैं। इससे नाला चोक हो जाता है। इस पर महापौर ने नाले के आसपास रहने वालों को चेताया साथ ही, कचरा फेंकने वालों को चिह्नित कर जुर्माना वसूलने के आदेश दिए हैं।
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शनिवार को नाले के निर्माण की फाइल मांगी गई है, जिसकी जांच की जाएगी। यदि कोई लापरवाही पाई जाती है तो दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होगी। - रामतीर्थ सिंघल, महापौर
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