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लाखों का माल सुतली की सुरक्षा में

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सुतली की सुरक्षा में लाखों का माल
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झांसी। ट्रेन के गार्ड डिब्बे के साथ लगेजवान (एसएलआर) में बुक होकर जाने वाला माल आज भी ताले की जगह सुतली पर लगी सील की सुरक्षा में रहता है। बदमाश लगातार सील तोड़कर लगेजवान से माल गिरा रहे हैं, लेकिन इस ओर से अफसर आंखें बंद किए हुए हैं। ट्रेनों में अनेक अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने में सफल रेलवे अब तक इस दिशा में कोई कारगर कदम नहीं उठा सका है। वर्षों पुरानी यह व्यवस्था अब भी जारी है।
स्टेशन आउटर या सेक्शन में रात के अंधेरे में खड़ी ट्रेनों के लगेजवान या मालगाड़ी के वैगन की सील तोड़कर सामान चोरी करने की घटनाएं लगातार होती रहती हैं। रेल मंडल में ही पिछले 10 साल में ऐसी 50 से अधिक घटनाएं हुईं। लाखों का माल बदमाश चोरी कर ले गए। आरपीएफ ने जब तब बदमाशों को पकड़ा भी, लेकिन इस अपराध पर अब तक लगाम नहीं लग सकी है।
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दरअसल, रेलवे कई मामलों में अब भी दशकों पुरानी व्यवस्था पर ही चल रहा है। आज भी लगेजवान के दरवाजे की कुंडी को सुतली से बांधने के बाद उसे चाबड़ की मुहर लगाकर सील कर दिया जाता है। इस प्रक्रिया के तहत रेलवे किसी ट्रेन के प्रारंभिक स्टेशन से बुक माल को गार्ड ब्रेक के साथ लगे लगेजवान में रखता है। ट्रेन चलने के पहले अगले ठहराव वाले स्टेशन का नाम पर्ची पर लिखने के बाद लगेजवान को सूतली से सील कर दिया जाता है। अगले स्टेशन पर ट्रेन के रुकने पर आरपीएफ जवान पहले सील को चेक करता है, इसके बाद ही लगेजवान को खोल कर दूसरे पैकेज रखे या उतारे जाते हैं। ऐसा हर ठहराव वाले स्टेशन पर किया जाता है। इसी व्यवस्था का बदमाश लाभ उठाते हैं। ट्रेन के कहीं खड़ी रहने के दौरान वे आसानी से सुतली की सील को तोड़ देते हैं। इसके बाद आसानी से सामान पटरियों के पास गिरा लेते हैँ।

अपनानी चाहिए आधुनिक तकनीक
रेलवे ने ट्रेनों के आवागमन से लेकर कोचों में अत्याधुनिक तकनीक उपयोग में लाई है। सुरक्षा व्यवस्था पर भी ध्यान दिया जाता है, लेकिन मालगाड़ी की इस खामी की ओर अब तक विभाग का ध्यान नहीं है। ऐसी कोई तकनीक का उपयोग अब तक नहीं किया गया जिससे माल सुरक्षित संबंधित स्थान पर पहुंचाया जा सके। रेलवे चाहे तो मालगाड़ी में माल रखने के बाद कोड सिस्टम जारी कर सकती है, जिसके आधार पर लगेल वान खोला व बंद किया जा सकता है।

लगेजवान का गेट सुगमता से खुल सके, इस कारण ही उसको सुतली से बंद किया जाता है। सील प्रमाणित करती है कि रास्ते में उसे कही खोला नहीं गया। - मनोज कुमार सिंह, जनसंपर्क अधिकारी।
खूब ओवर कैरी होता है माल
ट्रेनों में बुक किए जाने माल के ओवर कैरी (कहीं की बुकिंग और कहीं उतर जाना) की घटनाएं भी होती रहती हैं। संबंधित व्यक्ति यदि माल उतारने के लिए स्टेशन पर नहीं पहुंचता है तो माल ओवर कैरी हो जाता है। कई बार माल उतारने वाले कर्मचारियों की लापरवाही से भी यह समस्या आती है। रेलवे को ओवर कैरी माल पर हर वर्ष लाखों की चपत लगती है। हालांकि, रेलवे ने अब सभी ट्रेनों के इंजन के बगल में रहने वाले फ्रंट एसएलआर को निजी हाथों में दे दिया है। रेलवे पार्सल में बुक होने वाले माल को अब गार्ड के बगल में रहने वाले एसएलआर में ही रखा जाता है।
पहले लगेजवान के अंदर स्टेशन के हिसाब से माल को क्रमबद्ध तरीके से रखा जाता था और उसकी सूची गार्ड के पास रहती थी, लेकिन सालों पहले गार्ड को इस काम से मुक्त कर दिया गया। इससे बीच में फंसा माल ठहराव अवधि में निकालना मुमकिन नहीं होता और वह ओवर कैरी हो जाता है।
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स्कूटी की बैटरी चोरी
विगत 15 मार्च को पठानकोट एक्सप्रेस से एक फौजी ने अंबाला से झांसी के लिए स्कूटी और दो पैकेज बुक कराए थे। झांसी में स्कूटी को तो उतार लिया गया, लेकिन पैकेज ओवर कैरी हो गए। पार्सल कार्यालय से स्कूटी को छुड़ाने के बाद फौजी ने आरोप लगाया कि स्कूटी में लगी उसकी बैटरी चोरी हो गई। इस बात को लेकर फौजी ने मुख्य पार्सल पर्यवेक्षक को भी खरी खोटी सुनाई। सीपीएस का कहना था कि स्कूटी के साथ बैटरी को बुक ही नहीं किया जा सकता, क्योंकि बैटरी ज्वलनशील पदार्थ की श्रेणी में आती है। मगर, फौजी इस बात को मानने के लिए तैयार नहीं था।
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