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रेलवे क्रासिगों पर नजर रखेंगे सीसीटीवी कैमरे-City

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रेलवे क्रॉसिंग पर नजर रखेंगे सीसीटीवी कैमरे
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झांसी। रेलवे स्टेशन और आसपास की रेलवे क्रॉसिंगों पर जल्द ही सीसीटीवी कैमरे लगाने की तैयारी है। इससे क्रॉसिंग पर होने वाली दुर्घटनाओं के साक्ष्य मिलने के साथ ही हर गतिविधियों पर रेलवे की सीधी नजर होगी। क्रॉसिंग खोलने को लेकर गेटमैन के साथ होने वाली बदसलूकी भी कैमरे में कैद होगी। गेट तोड़कर भागने वाले वाहन भी तीसरी आंख की जद में रहेंगे। मंडल की रेलवे क्रांसिगों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने के लिए सर्वे कार्य शुरू कर दिया गया है।
अब रेलवे क्रॉसिंगों पर तैनात कर्मचारियों से जबरन अभद्रता व दबाव बनाकर गेट खुलवाना आसान नहीं होगा, साथ ही गेट तोड़कर चालकोें को भागने में आसानी नहीं होगी। रेलवे ने मंडल और आसपास के इलाकों में गेटमैनों के साथ होने वाली घटनाओं के मद्देनजर बड़ा फैसला लिया है। इसके तहत मंडल की रेलवे क्रॉसिंग पर सीसीटीवी कैमरे लगाने की तैयारी शुरू कर दी गई है। जल्द ही शुरूआती चरण में झांसी मुंबई रेलमार्ग पर स्थित रेलवे क्रॉसिंगों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने की तैयारी है। झांसी से ग्वालियर व झांसी-कानपुर के मध्य करीब दस रेलवे क्रॉसिंगों पर सीसीटीवी लगाए जाएंगे। मंडल में इसके लिए सर्वे शुरू कर दिया गया है। जल्द ही अप्रैल से सीसीटीवी कैमरे लगाने का काम शुरू होगा। एक लेवल क्रॉसिंग गेट पर दो कैमरे व अन्य उपकरण मिलाकर करीब 30 हजार रुपये का खर्च आ रहा है। इससे मारपीट के साथ ही अन्य आपराधिक घटनाओं में कमी आने की उम्मीद रेलवे के अधिकारी कर रहे हैं। जनसंपर्क अधिकारी मनोज कुमार सिंह ने बताया कि रेलवे बोर्ड के आदेश पर कैमरे लगाए जाने की तैयारी है।
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यह होगा फायदा
- कोई भी व्यक्ति गेटमैन को धमका नहीं सकेगा।
- हर आने-जाने वाले वाहन व लोग भी जद में रहेंगे।
- जबरन नहीं खुलवा सकेंगे गेट, कैद होगा सुबूत।
- कार्रवाई करने में आरपीएफ को भी मिलेगी मदद।

अकसर टूटती ग्वालियर रोड की रेलवे क्रॉसिंग
वर्तमान में सबसे ज्यादा दबाव झांसी-कानपुर रेलमार्ग स्थित ग्वालियर रेलवे क्रॉसिंग पर है। 24 घंटे में करीब 12 करीब क्रॉसिंग बंद रहने से वाहनोें की कतार लगी रहती है। गेट बंद होते समय जल्दबाजी में वाहन निकलने के प्रयास में गेट टूट जाते हैं। ऐसे में चालक पकड़ में भी नहीं आ पाता और वाहन लेकर भाग जाते हैं। इसके अलावा, रात के समय कई बार तो क्रॉसिंग खुलवाने के लिए गेटमैन को धमकाया भी जाता है। ऐसे में किसी तरह का सुबूत न होने के कारण गेटमैन भी शिकायत करने से बचते हैं।
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