झांसी। पेयजल एवं सिंचाई का रकबा बढ़ाने के लिए शुरू हुई महत्वाकांक्षी 610 करोड़ की एरच बांध परियोजना घोटालों की चल रही जांच में ही उलझ गई है।
पिछले वर्ष मुख्यमंत्री ने खुद परियोजना का काम फिर से आरंभ कराने का भरोसा दिलाया था। लेकिन अभी तक यहां काम आरंभ नहीं हो सका। परियोजना पर अब तक 401 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं।
योगी सरकार ने इन आरोपों के चलते काम बंद कराके ईडब्ल्यूएस जांच के निर्देश दिए। इसके बाद से परियोजना ठप पड़ी है।
साढ़े सोलह करोड़ रुपये के घपले की आशंका
बांध निर्माण के दौरान नीचे से निकले पत्थरों को बिना टेंडर कराए मनमाने दाम पर बेच दिए गए। इसकी जांच आर्थिक अपराध अनुसंधान शाखा से कराई गई। विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक जांच में करीब साढ़े सोलह करोड़ रुपये की गड़बड़ी की पुष्टि हुई है। जांच रिपोर्ट में माना गया कि खोदाई में निकले पत्थरों की नीलामी नहीं कराई गई। तत्कालीन अभियंताओं ने इस खनिज को मनमाने तरीके से खुद ही बेच दिया। जांच में सामने आया कि जिस खनिज की कीमत उस दौरान सवा दो सौ रुपये थी उसे आधी से भी कम कीमत पर चहेतों ठेकेदारों को दे दिया गया। यह रिपोर्ट शासन के पास है। इसमें एक एसई, दो एक्सईएन, सात एई एवं छह जेई पर कुल साढ़े 16 करोड़ रुपये के घपले की बात कही गई है।
इस परियोजना जांच अभी पूरी नहीं हुई है। इस वजह से काम आरंभ नहीं हो सका। शासन से नए निर्देश मिलने पर ही काम आगे बढ़ाया जा सकेगा। राजपाल सिंह, मुख्य अभियंता, परियोजना बेतवा