टावरों से होगी शहर की निगहबानी
झांसी। अब कॉल और इंटरनेट की सुविधा देने के साथ ही मोबाइल टावर शहर की निगहबानी भी करेंगे। महानगर के सभी मोबाइल टावरों पर सीसीटीवी कैमरे लगाकर हर गतिविधि पर नजर रखी जाएगी। इसके अलावा घटना की वास्तविक जानकारी भी उपलब्ध कराएगा। इसके लिए पुलिस व मोबाइल कंपनी टावर के साथ सीसीटीवी कैमरे भी लगाएगी। ये कैमरे पुलिस कंट्रोल रूम से भी जुड़े रहेंगे, जिससे हर समय निगरानी हो सकेगी। ऐसे में आपराधिक घटना कर निकलना आसान नहीं होगा। पुलिस ने कैमरे लगाने की योजना शुरू कर दी है। चार-चार सीसीटीवी कैमरों से टावर लैैस होंगे।
मोबाइल नेटवर्क को गांव-गांव तक पहुंचाने के लिए जिले में जगह-जगह टावर लगे हैं। सुनसान स्थानों पर अधिकांश मोबाइल टावर सड़क किनारे लगे हैं। शहरी आबादी में मुहल्ले व गलियों में भी टावर लगाए गए हैं। ऐसे में पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था के तहत मोबाइल टावर का उपयोग बढ़ाने की योजना तैयार की है। बढ़ते अपराध और अपराधियों पर रोक लगाने के लिए मोबाइल टावर को जासूस के रूप में प्रयोग करने की योजना बनाई है। इसके तहत टावर के चारों ओर गोपनीय सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। सीसीटीवी को मोबाइल नेटवर्क से भी जोड़ा जाएगा, जिसका संपर्क पुलिस कंट्रोल रूम से किया जाएगा। जिस टावर को कंट्रोल रूम से नहीं जोड़ा जा सकता, उस क्षेत्र में कोई घटना होने पर पुलिस सीसीटीवी का रिकॉर्ड खंगाल कर अपराध करने वालों की जानकारी जुटाएगी। कानून व्यवस्था और गोपनीय सूचना की जानकारी के लिए स्थानीय पुलिस व गुप्तचर शाखा को मोबाइल, लैंडलाइन कनेक्शन व सिस्टम भी दे रखा है। इस मामले में एसएसपी डॉ. ओपी सिंह ने बताया कि इस तरह का आदेश उनके पास नहीं आया है।
ये होगी खासियत
इन कैमरों को 360 डिग्री घुमाकर आसपास के इलाके की किसी भी प्रकार की गतिविधियों को नजदीकी से देखा जा सकेगा। हाई रेज्युलेशन सीसीटीवी कैमरों के देखने की क्षमता 800 मीटर दूरी तक की रहेगी। कैमरों के नजदीक से गुजर रहे वाहनों के नंबर भी कैमरों में कैद हो जाएंगे। रात में भी किसी तरह की घटना को अंजाम देकर भागने वाले बदमाशों की निगहबानी के लिए सीसीटीवी कैमरों में नाइट विजन लगाया जाएगा, ताकि रात की फुटेज एकदम साफ मिल सके।