उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर का काम तेजी से चल रहा है। कॉरिडोर में बनने वाले गोला और बारूद का परीक्षण भी यहीं पर होगा। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए जिले में सौ एकड़ जमीन और अधिग्रहीत होगी। यह काम अगस्त तक पूरा कर लिया जाएगा। साथ ही, कॉरिडोर में बनने वाले सुरक्षा से जुडे़ उपकरणों के लिए आईआईटी कानपुर और बीएचयू वाराणसी के जानकार भी आधुनिक तकनीक उपलब्ध कराएंगे।
कॉरिडोर के लिए 5071.19 हेक्टेयर जमीन चरणबद्ध तरीके से खरीदी जा रही है, जिस पर 3275.34 करोड़ रुपये खर्च होंगे। जिले में सर्वाधिक 59 प्रतिशत जमीन अधिग्रहीत की जानी है। उद्योग विभाग जमीन की खरीद पांच चरणों में करेगा। जरूरत के अनुसार पांच प्रतिशत जमीन और अधिग्रहीत की जाएगी। उद्देश्य यह है कि कॉरिडोर में जो भी गोला और बारूद बनेगा, उसके परीक्षण के लिए बड़ी साइट छोड़ी जाए, ताकि आसानी से यह काम हो सके। यह काम अगस्त तक पूरा कर लिया जाएगा। डिफेंस कॉरिडोर से बीस हजार करोड़ रुपये का निवेश होने और ढाई लाख लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है।
कॉरिडोर में पांच पार्क तैयार होंगे, जिनमें से एक में निर्माण क्षेत्र में एयरोस्पेस पार्ट्स, दूसरे में टेस्टिंग (परीक्षण) होगी, तीसरे में हार्डवेयर बनेंगे, चौथे में प्रौद्योगिकी नवाचार केंद्र और पांचवें में आवास एवं आम सुविधा केंद्र बनाए जाएंगे। झांसी और चित्रकूट के आसपास बुंदेलखंड को ‘ग्रीन फील्ड रक्षा औद्योगिक क्लस्टर’ के रूप में विकसित किया जाएगा।
उत्तर प्रदेश सरकार औद्योगिक निवेश और रोजगार प्रोत्साहन नीति- 2017 के प्रावधानों के अनुसार रक्षा और एयरोस्पेस उद्योग को 24 घंटे बिजली आपूर्र्ति की जाएगी।
डिफेंस कॉरिडोर के लिए शासन स्तर पर तेजी से काम चल रहा है। जिले में गोला-बारूद का परीक्षण होगा। इसके लिए अभी और जमीन अधिग्रहीत की जाएगी। जल्द ही, प्रस्ताव बनाकर भेजा जाएगा। कॉरिडोर से बुंदेलखंड में विकास बहुत तेजी से होगा।
- सुधीर कुमार श्रीवास्तव, उपायुक्त उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन केंद्र