फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जीरो बजट खेती- प्रशिक्षण शिविर शुभारंभ

विज्ञापन
विज्ञापन

विज्ञापन
सभी ब्लाकों के दो- दो गांव में करेंगे शून्य लागत खेती: शाही

अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। कृषि, कृषि शिक्षा एवं कृषि अनुसंधान विभाग के मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि प्रदेश भर के सभी ब्लाकों के दो- दो गांवों में शून्य लागत खेती को प्रयोग के तौर पर शुरू करेंगे। रासायनिक खेती से उत्पादन तो बढ़ा है, लेकिन किसान की सेहत में कोई सुधार नहीं हुआ, उत्पादन बढ़ने से लागत दिनाें दिन बढ़ती जा रही है। बुंदेलखंड में अभी तक प्राकृतिक खेती हो रही है, कठिया गेहूं इसका प्रमाण है।
शुक्रवार को पैरा मेडिकल कॉलेज में 26 सितंबर तक चलने वाले शून्य लागत प्राकृतिक खेती प्रशिक्षण शिविर का शुभारंभ कृषि मंत्री ने दीप जलाकर किया। उन्होंने कहा कि देश आदिकाल से प्राकृतिक खेती कर रहा है। दूसरे विश्वयुद्ध से पहले रासायनिक खाद का प्रयोग नहीं होता था, लेकिन जब से रासायनिक खाद का प्रयोग हुआ, तो खेती का उत्पादन तेजी से बढ़ा। परंतु, इससे किसान की सेहत में सुधार नहीं हुआ, उत्पादन बढ़ा तो लागत बढ़ती चली गई। बुंदेलखंड में प्राकृतिक खेती हो रही है, कठिया गेहूं इसका प्रमाण है। इसी प्राकृतिक खेती का परिणाम है कि सिक्किम रासायनिक खाद मुक्त प्रदेश घोषित हो चुका है। उत्तर प्रदेश में किसान मेहनत से फसल उत्पादन कर रहे हैं। इसका अंदाजा पिछले दिनों हुई गेहूं की खरीद से लगाया जा सकता है। उप्र में पहली बार 53 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीद हुई। कृषि अनुसंधान केंद्रों में शून्य लागत खेती पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू की जाएगी।
विज्ञापन

कृषि ऋषि पद्मश्री सुभाष पालेकर ने कहा कि जैविक खेती में कंपोस्ट, वर्मी कंपोस्ट समेत सभी घटक विदेशी पद्धति से लिए गए है, इसलिए जैविक खेती को प्राकृतिक खेती नहीं कह सकते हैं। शिविर समन्वयक योगर्षि अविनाश ने कहा कि बुंदेलखंड की परिस्थितियां शून्य लागत प्राकृतिक खेती के अनुकूल हैं। यदि किसान इसे अपनाएंगे तो निश्चित तौर पर उनकी आमदनी बढ़ेगी और समृद्धि आएगी। कार्यक्रम संयोजक/ विधायक राजीव सिंह पारीछा ने स्वागत भाषण पढ़ा। संचालन प्राकृतिक कृषि अभियान के समन्वयक गोपाल उपाध्याय ने किया।

यह रहे मौजूद
सांसद भानुप्रताप वर्मा, महापौर रामतीर्थ सिंघल, विधायक माधौगढ़ मूलचंद्र निरंजन, नरेंद्र सिंह जादौन, रवि शर्मा, जवाहर लाल राजपूत, बिहारी लाल आर्य, धनगढ़ी नेपाल के फूलाराम चौधरी, उप कृषि निदेशक रामप्रताप, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. योगेंद्र सिंह तोमर, कृषि वैज्ञानिक पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय डॉ. सुनीता, रानीखेत के लक्ष्मण कड़ाकोटि, हिमाचल प्रदेश के वैज्ञानिक डॉ. एके नेगी, जम्मू एंड कश्मीर के तुषार देसाई, श्याम बिहारी गुप्ता, प्रवीणा मिश्रा, कैलाश अग्रवाल, नितिन चौरसिया, महेंद्र मोदी मौजूद रहे।
विज्ञापन


गरौठा से कठिया गेहूं ले जाते रहे
कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि 1985 में जब वह विधायक थे, तब बुंदेलखंड के कठिया गेहूं का बहुत नाम सुना था। इसलिए वह गरौठा से कठिया गेहूं ले जाते थे। सही मायने में यह गेहूं प्राकृतिक खेती का नमूना था।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें