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जूनियर डॉक्टरों ने तीमारदारों को पीटा, महिलाओं को नहीं बख्शा
- मरीज को दूसरे वार्ड में शिफ्ट करने को लेकर हुआ विवाद
- पुलिस ने की जांच, परिजन मरीज को डिस्चार्ज कराकर ले गए
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज के वार्ड नंबर तीन में जूनियर डॉक्टरों ने तीमारदारों के साथ जमकर मारपीट की। जूनियर डॉक्टरों ने महिलाओं को भी नहीं बख्शा। मारपीट में तीमारदारों को गंभीर चोटें आई हैं। कॉलेज अधिकारी और पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच की। डॉक्टरों के खौफ की वजह से तीमारदार मरीज को डिस्चार्ज कराकर ले गए।
इटावा निवासी सुनील कुमार सिंह की ट्रेवल एजेंसी है। उनके पुत्र हर्षित का बीते छह जुलाई को इटावा में ही कार से एक्सीडेंट हो गया था। दुर्घटना में हर्षित के दाएं पैर के निचले हिस्से की त्वचा क्षतिग्रस्त हो गई थी। चार-पांच दिन पहले परिजनों ने हर्षित को महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज के सर्जरी विभाग के वार्ड नंबर तीन में भर्ती कराया। हर्षित के भाई निखिल का आरोप है कि सोमवार की शाम लगभग चार बजे सर्जरी विभाग का एक जूनियर डॉक्टर आया और मां गीता देवी से ऐंठ कर बोला कि मरीज को 10 मिनट के अंदर दूसरे वार्ड में शिफ्ट कर दो। परिजनों ने इसकी सूचना सीनियर डॉक्टर को दी तो कुछ देर बाद जूनियर डॉक्टर आया और फिर गीता देवी ने जब शिफ्ट करने का कारण पूछा तो बदतमीजी से बात करने लगा। निखिल ने बताया कि मां के साथ गलत व्यवहार होते देख उसकी बुआ के लड़के हैप्पी सोनी ने विरोध किया। इस पर जूनियर डॉक्टर ने मारपीट शुरू कर दी। कुछ ही देर में कई जूनियर डॉक्टर एकत्र हो गए। सबने मिलकर हैप्पी को लात, घूंसों से जमकर पीटा। उसकी टी-शर्ट भी फाड़ दी। रोकने पर पिता सुनील कुमार सिंह, फूफा विवेक सोनी के साथ भी मारपीट की। इससे पिता की आंख में गंभीर चोटें आईं। मोबाइल फोन भी तोड़ दिया। बीच बचाव करने आईं मां, बुआ को भी पीट दिया।
निखिल का आरोप है कि एक रिश्तेदार महिला के साथ जूनियर डॉक्टरों ने अश्लीलता भी की। मामले की सूचना पर कॉलेज के आलाधिकारी और पुलिस कर्मचारी मौके पर पहुंचे। तब तक जूनियर डॉक्टर भाग खड़े हुए। पुलिस ने शिकायत दर्ज की है। घटना के बाद परिजन इतना खौफजदा हो गए कि वह मरीज को डिस्चार्ज कराकर दूसरे अस्पताल ले गए। इस संबंध में जब प्राचार्य डॉ. साधना कौशिक से बात की गई तो उन्होंने कहा कि वह एक निजी कार्यक्रम की वजह से शहर से बाहर हैं। मंगलवार को लौटने पर जांच कराई जाएगी। वहीं, सीएमएस डॉ. हरीशचंद्र आर्या का कहना है कि तीमारदारों को प्रार्थनापत्र देने को कहा गया है। यदि वह शिकायती पत्र देंगे तो मामले की जांच कराई जाएगी। इसके बाद जो दोषी होगा, उस पर कार्रवाई होगी।
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विरोध में खड़े हो गए लोग
सर्जरी वार्ड में जूनियर डॉक्टरों द्वारा मरीज के तीमारदारों की पिटाई के बाद वहां भर्ती दूसरे मरीजों के तीमारदार भी आक्रोशित हो गए। वह हर्षित के परिजनों के साथ खड़े हुए और जूनियर डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करने लगे। स्थिति भांपकर जूनियर डॉक्टर वार्ड छोड़कर भाग गए।