पुरखों का तर्पण कर मांगेंगे वंश की खुशहाली
सबहेड:: पितृ पक्ष छह से, पूर्णिमा व प्रतिपदा एक साथ
क्रासर
बीस सितंबर को होगा विसर्जन
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
बुधवार से पितृ पक्ष शुरू हो रहे हैं। इस बार पूर्णिमा और प्रतिपदा तिथि एक साथ होगी। लोग नदी, तालाबों के घाट पर जाकर अपने पुरखों का तर्पण कर उनसे परिवार की खुशहाली का आशीर्वाद मांगेंगे। बीस सितंबर को पितृ विसर्जन अमावस्या पर पुरखों को विदाई दी जाएगी।
सनातन धर्म के कई धार्मिक ग्रंथों वायु पुराण, मत्स्य पुराण, गरुण पुराण, विष्णु पुराण में श्राद्ध कार्य का विशेष महत्व है, जो भाद्र शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा से आश्विन कृष्ण पक्ष की अमावस्या तक मनाया जाता है। महंत विष्णु दत्त स्वामी ने बताया कि पुरखों की स्मृति में श्राद्ध करने से व्यक्ति का वंश खुशहाल रहता है। जलाशय में तर्पण दौरान कुशा की अंगूठी अनामिका उंगली में पहने। कुशा का गुच्छा हाथ में लेकर पुरखोें को काले तिल, जौ और चावल लेकर तर्पण करे। पूर्व दिशा में चावल लेकर मुख करके देवताओं को, जौ लेकर उत्तर दिशा में मुख करके सप्त ऋषियों को और दक्षिण दिशा में मुख करके काले तिल के द्वारा पुरखों को तर्पण किया जाता है। श्राद्ध कार्य में कौवों, गायों को भी भोजन खिलाया जाता है। श्राद्ध में गंगाजल, दूध, शहद, कुशा का गुच्छा जिसे मोटक कहते है के अलावा कपड़ा और तिल आवश्यक है।
महालक्ष्मी पर खरीद सकते है नई वस्तुएं
पित़ृ पक्ष में नई वस्तुओं की खरीद फरोख्त, गृह प्रवेश सहित सभी शुभ कार्य नहीं होते। लेकिन, महालक्ष्मी पर्व पर जो 13 सितंबर को है, पर नई वस्तुओं की खरीददारी लोग कर सकते हैं।
मातृ नवमी 14 को
मातृ नवमी 14 सितंबर को होगी। पंडित शांतनू पांडेय के मुताबिक इस दिन उन महिलाओं का श्राद्ध होता है, जिनके निधन की तिथि पता नहीं है। सन्यासियों का श्राद्ध 17 सितंबर को और आखिरी दिन अमावस्या पर उन संबंधित व्यक्तियों का श्राद्ध होता है, जिनके निधन की तिथि पता नहीं होती है।
इन जलाशयों में करते है लोग तर्पण
महानगर के विभिन्न जलशयों में लोग अपने पुरखोें को तर्पण करने के लिए जुटते है। इनमें आंतिया तालाब, पानी वाली धर्मशाला, भूतनाथ मंदिर से लगा लक्ष्मी तालाब प्रमुख है।