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गेहूं का सीजन शुरू होते ही पचास रुपये महंगी हुई डीएपी

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झांसी। रबी सीजन में गेहूं की बुवाई आरंभ होने के समय ही किसानों को सरकार ने तगड़ा झटका दिया है। सीजन की शुरुआत में ही प्रति बोरी डीएपी के दाम में पचास रुपये की बढ़ोत्तरी कर दी गई। डीजल के दाम लगातार बढ़ते जाने से किसान पहले ही परेशान हैं। डीएपी में बढ़ोत्तरी उर्वरकों पर मिलने वाली सब्सिडी के खत्म किए जाने एवं रसायनों के संकट के चलते की गई। ऐसे में संभावना जताई जा रही कि जल्द ही यूरिया के दाम भी बढ़ाए जा सकते हैं।
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गेहूं की बोवाई इसी माह से आरंभ होने को है। इसी दौरान डीएपी की मांग सर्वाधिक बढ़ जाती है लेकिन, अब किसानों को प्रति बोरी पचास रुपये अधिक चुकाने होंगे। पिछले सीजन तक इफ्को डीएपी समेत अन्य 1150 रुपये प्रति बोरी मिलती थी लेकिन, अब इसका दाम बढ़ाकर 1200 रुपये कर दिया गया। आयुक्त निबंधक एमबीएस रामी रेड्डी की ओर से जारी आदेश में सब्सिडी में कटौती समेत आयात एवं रसायनों को मिलने में आ रही मुश्किलों को वजह बताया गया है।
अभी तक डीएपी पर 480 रुपये प्रति मीट्रिक टन की मर्जिन मनी के साथ तीन सौ रुपये प्रति मीट्रिक टन के हिसाब से विशेष छूट दी जाती थी जिसे 30 सिंतबर को खत्म कर दिया गया। इस सब्सिडी के खत्म होने का सीधा बोझ अब किसानों को उठाना होगा। इसके अलावा उर्वरकों के लिए आवश्यक कच्चा माल दूसरे देशों से आता था , जिसका अभी आयात नहीं हो पा रहा। इन सारी वजह से यूरिया के दाम भी जल्द बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। अभी फिलहाल यूरिया 266 रुपये प्रति बोरी के हिसाब से मिल रही है। बता दें, गेहूं बोवाई में डीएपी खाद की सर्वाधिक आवश्यकता होती है। सरकार पहले भी खाद की बोरियों का वजन कम कर चुकी। वहीं, प्रभारी उपनिदेशक कृषि केके सिंह का कहना है खाद के दाम में बढ़ोत्तरी इस सीजन से करने के निर्देश मिले हैं।
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45 हजार बोरियों की इस बार जरूरत
झांसी में रबी की फसल कुल 3.095 लाख हेक्टेयर में होती है। इनमें गेहूं के साथ जौ, चना, मटर, मसूर एवं तिलहन की फसल में राई, सरसों एवं अलसी की बुवाई होती है। इस वर्ष करीब 1.70 लाख हेक्टयेर में सिर्फ गेहूं की बुवाई होगी। रबी सीजन के लिए जनपद में पिछले वर्ष 40 हजार बोरी डीएपी की जरूरत आंकी गई थी। इस बार करीब 45 हजार बोरियों की जरूरत होगी।
डिजिटल पेंमेंट करने पर ही मिलेगी खाद
किसानों को इस बार नकद पैसे देने पर खाद नहीं मिलेगी। सरकार ने नई व्यवस्था लागू करते हुए डिजिटल पेमेंट को अनिवार्य कर दिया है। सभी खाद दुकानदारों को इस संबंध में सख्त निर्देश दिए गए हैं। पिछले एक माह के दौरान विभाग की ओर से इसके लिए अभियान भी चलाया गया। तमाम दुकानदारों ने डिजिटल पेमेंट व्यवस्था तैयार कर ली लेकिन, गांव में नेटवर्क न होने की वजह से वह काम ही नहीं कर पा रहा लेकिन, अफसरों को इसकी कोई परवाह नहीं है। किसान भी अभी इस व्यवस्था के साथ तालमेल नहीं बिठा पा रहा है।
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