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50 फीसदी कैंसर रोगियों की स्टेज बढ़ी, कई तो सर्जरी लायक नहीं बचे

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झांसी। कोरोना काल में इलाज प्रभावित होने से लगभग 50 फीसदी कैंसर रोगियों की स्टेज बढ़ गई है। यानी कि जो पहली स्टेज में थे वो दूसरी और जो दूसरी स्टेज में थे वो तीसरी या चौथी में पहुंच गए हैं। इसके अलावा कई ऐसे मरीज भी सामने आए हैं, जो सर्जरी लायक बचे ही नहीं। इसके अलावा कइयों की ऑपरेशन के बाद कीमोथेरेपी या सर्जरी समय से नहीं हो पाने के चलते उनकी बीमारी फिर से बढ़ गई।
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कोरोना के चलते गंभीर बीमारियों से ग्रसित रोगियों को भी काफी परेशानी हुई है। दूसरी लहर में टूटे कोरोना के जबरदस्त कहर के चलते अधिकांश निजी अस्पताल भी कोविड अस्पताल बना दिए गए। वहीं, सरकारी हॉस्पिटल तो कोविड के मरीजों से खचाखच भरा रहा। कई मरीज बाहर इलाज कराने के लिए जा नहीं पाए। वहीं, कई कोविड संक्रमण के डर से घरों से बाहर नहीं निकले। इस कारण कैंसर की स्टेज बढ़ती चली गई। मेडिकल कॉलेज के आंकड़े देखें तो यहां पर 1150 के आसपास मरीज पंजीकृत हैं। पहले टेलीमेडिसिन सुविधा शुरू होने और अब ओपीडी खुल जाने के बाद मेडिकल कॉलेज में दिखाने आए लगभग 550 मरीज बढ़ी हुई स्टेज के मिले हैं। इससे स्पष्ट है कि लगभग 50 फीसदी रोगी, ऐसे रहे जिन्हें इस बीमारी ने और संकट की स्थिति में पहुंचा दिया है।
ये है इलाज का तरीका
विशेषज्ञों ने बताया कि पहली और दूसरी स्टेज के कैंसर रोगियों में कीमोथेरेपी के बाद सर्जरी कर दी जाती। कुछ ही मामले ऐसे होते हैं, जो सिर्फ कीमोथेरेपी से मरीज पूरी तरह ठीक हो जाते हैं। वहीं, जिनकी सर्जरी हो चुकी होती है, उन्हें बाद में कीमोथेरेपी अथवा रेडियोथेरेपी की जरूरत पड़ती है।
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केस-1
हमीरपुर की राठ निवासी 50 वर्षीय महिला कैंसर से पीड़ित हैं। उन्हें जीभ का कैंसर है। कोरोना काल में मेडिकल कॉलेज की ओपीडी बंद हो जाने की वजह से वह दिखा नहीं पाईं। बीच में ही इलाज प्रभावित हो गया तो जीभ का कैंसर बढ़ गया। अभी सर्जरी करना संभव नहीं है।
केस-2
सदर बाजार निवासी महिला का मुंबई में ब्रेस्ट कैंसर का ऑपरेशन हुआ था। कोरोना के चलते उनकी कीमोथेरेपी झांसी में संभव नहीं हो पा रही थी। इससे वह काफी परेशान थीं। हालांकि, डॉ. अंशुल गोयल ने प्रयास कर उनके घर पर ही कीमोथेरेपी की व्यवस्था करा दी।
केस-3
नगरा की 65 वर्षीय वृद्ध के भी जीभ में कैंसर हो गया। कोरोना काल में इलाज न मिल पाने के कारण बीमारी इलाज से बाहर हो गई। अब मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों ने उनकी कीमोथेरेपी शुरू कर दी है। इसके जरिए उनकी बीमारी कम करने का प्रयास किया जा रहा है।
केस-4
बबीना ब्लॉक निवासी 45 साल के व्यक्ति भी कुछ समय पहले जीभ का कैंसर होने पर ऑपरेशन कराया था। बीच में ही कोरोना की दूसरी लहर शुरू हो गई तो समय पर उनकी सिकाई पूरी नहीं हो सकी। इस कारण बीमारी वापस आ गई है। अब उनकी कीमोथेरेपी चल रही है।
कोरोना महामारी में कैंसर रोगियों का इलाज बाधित तो हुआ है। अभी तक की जांच में 50 फीसदी रोगियों की कैंसर की स्टेज बढ़ गई है। मगर कई कैंसर मरीजों का टेलीमेडिसिन के जरिए उनके घर पर ही अपनी निगरानी में कीमोथेरेपी की व्यवस्था कराई गई थी। इससे कैंसर की स्टेज आगे नहीं बढ़ पाई। कैंसर रोग विशेषज्ञों की निगरानी में कुछ कीमोथेरेपी घर पर ही करवा सकते हैं। - डॉ. अंशुल गोयल, कैंसर रोग विशेषज्ञ, मेडिकल कॉलेज।
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